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लोकसभा चुनाव 2019 : टिकट देते समय भाजपा ने किए कई बदलाव, पूर्वांचल में बाहुबलियों से किया किनारा

Tue, 16 Apr 2019 03:13 PM IST
Sayali Maurya प्रदीप मिश्र,अमर उजाला,वाराणसी
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पूर्वांचल में छठे चरण में होने वाले चुनाव के लिए भाजपा ने प्रत्याशी चयन में कई समीकरण साध रखे हैं। जिसमें क्षेत्रीय-जातीय समीकरण, भोजपुरी कला-संस्कृति के प्रभाव के साथ-साथ सहयोगी दलों से गठबंधन की वचनबद्धता का ध्यान रखा है। वहीं सातवें चरण में आने वाली मऊ जिले की घोसी सीट गठबंधन और प्रदेश सरकार में शामिल सुभासपा को देने की गुंजाइश छोड़ रखी है। 

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, दो केंद्रीय मंत्रियों मनोज सिन्हा, अनुप्रिया पटेल और भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. महेंद्र नाथ पांडेय को टिकट देने के बाद भी पार्टी ने गठबंधन के साथ वाराणसी, आजमगढ़ और मिर्जापुर मंडल की 12 सीटों में से पांच पर उम्मीदवार बदल दिए हैं। दिनेश लाल यादव 'निरहुआ', बीपी सरोज और रमेश बिंद पार्टी और कार्यकर्ताओं के लिए बिल्कुल नए चेहरे हैं।

बलिया के मौजूदा सांसद भरत सिंह का टिकट काट दिया तो उन्हीं की बिरादरी के भदोही सांसद वीरेंद्र सिंह 'मस्त' को प्रत्याशी बना दिया। वीरेंद्र सिंह 'मस्त' पार्टी के किसान मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं और इस नाते उन्हें बलिया भेज दिया गया।
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गठबंधन धर्म निभाते हुए राबर्ट्सगंज सीट से अपने मौजूदा सांसद छोटेलाल खरवार का टिकट काटकर सहयोगी अपना दल (एस) को दे दी। इससे साफ हो गया कि नाराजगी का नतीजा यही होता है। 
 

फिल्म स्टारों पर भाजपा ने लगाया दांव

रवि किशन और दिनेश लाल यादव 'निरहुआ' - फोटो : ani
आजमगढ़ से रमाकांत यादव को फिर मैदान में उतारने की बजाय उनकी ही जाति के भोजपुरी फिल्म स्टार 'निरहुआ' पर दांव लगाकर भाजपा ने अलग संदेश दिया है। सपा उम्मीदवार अखिलेश यादव के खिलाफ उनके पिता मुलायम सिंह के गढ़ में भाजपा की चुनावी लड़ाई अलग मोड़ देने की कोशिश भी है।

जौनपुर के मूल निवासी भोजपुरी फिल्म जगत में स्टारडम शुरू करने वाले रवि किशन को गोरखपुर से उम्मीदवार बनाकर बता दिया कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश में चुनाव लड़ रहीं हेमामालिनी और जयाप्रदा के साथ-साथ पूर्वी उत्तर प्रदेश में लोक संस्कृतियों से जुडे़ कलाकारों से उसका गहरा रिश्ता है।
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रमेश चंद्र बिंद - फोटो : अमर उजाला
यही नहीं, पाला बदलने वालों को तरजीह देते हुए पार्टी ने रमेश बिंद को भदोही से उम्मीदवार बना दिया। लोकसभा चुनाव से ठीक पहले बसपा से निष्कासित रमेश बिंद के मुकाबले पार्टी ने अलग छवि के निर्दलीय विधायक विजय मिश्र की दावेदारी को नजरअंदाज कर दिया।

बिंद की पत्नी समु्द्रा बिंद 2014 में मिर्जापुर संसदीय सीट से दूसरे स्थान पर रही थीं। दूसरी ओर जौनपुर सीट पर कांग्रेस द्वारा ब्राह्मण और सपा-बसपा गठबंधन के यादव उम्मीदवार के जवाब में भाजपा के पास केपी सिंह को दोहराने के अलावा कोई विकल्प नहीं था। हालांकि पार्टी ने इस तरह से यहां से निषाद पार्टी की टिकट पर पूर्व सांसद धनंजय सिंह को चुनाव लड़ाने की योजना पर विराम लगा दिया।
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