वाराणसी जिले के सरकारी अस्पतालों में चिकित्सकों की कमी लंबे समय से बनी हुई है। आए दिन खाली पदों को भरने के दावे किए जाते हैं, लेकिन स्थिति जस की तस है। हालत यह है कि कई प्रमुख विशेषज्ञ ही अस्पतालों में नहीं हैं।
वाराणसी जिले के सरकारी अस्पतालों में चिकित्सकों की कमी लंबे समय से बनी हुई है। आए दिन खाली पदों को भरने के दावे किए जाते हैं, लेकिन स्थिति जस की तस है। हालत यह है कि कई प्रमुख विशेषज्ञ ही अस्पतालों में नहीं हैं, जिसकी वजह से मरीजों को निजी अस्पतालों में जाना पड़ता है।
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सबसे अधिक संकट हृदय रोग विशेषज्ञों की है। दीनदयाल अस्पताल में जहां हृदय रोग विशेषज्ञ नहीं हैं। मंडलीय अस्पताल में पद तो दो स्वीकृत हैं लेकिन एक ही हृदय रोग विशेषज्ञ सेवा कर रहे हैं। ऐसे में मरीजों का दबाव बढ़ गया है। 300 से 400 मरीजों की हर दिन ओपीडी वाले जिला महिला अस्पताल में भी स्त्री रोग विशेषज्ञ के छह पद लंबे समय से खाली पड़े हैं।
दीनदयाल अस्पताल में 43 स्वीकृत पदों के सापेक्ष केवल 22 चिकित्सक ही हैं। मंडलीय अस्पताल कबीरचौरा में फिजिशियन, चेस्ट फिजिशियन नहीं हैं। सर्जन के तीनों पद खाली हैं। शास्त्री अस्पताल रामनगर में 32 स्वीकृत पदों में केवल 19 चिकित्सक ही सेवा दे रहे हैं। सीएमओ डॉ. संदीप चौधरी ने कहा कि सरकारी अस्पतालों में आने वाले मरीजों को बेहतर सुविधाएं मुहैया कराई जा रही हैं। चिकित्सकों की कमी को दूर करने की दिशा में हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं।