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जर्जर भवन गिरने का मामला: मां को ढूंढती रहीं आंखें, पिता बोले- दूसरे अस्पताल में चल रहा इलाज; लोग हो गए भावुक

Wed, 07 Aug 2024 10:01 AM IST
अमन विश्वकर्मा अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।

सार

Varanasi News: काशी विश्वनाथ मंदिर के पास येलो जोन में हुए दर्दनाक हादसे के बाद हर कोई सहम गया। एनडीआरएफ की टीम ने सभी घायलों को रेस्क्यू कर बाहर निकाला। मंडलीय और बीएचयू अस्पताल में सभी का इलाज लच रहा है।
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मंडलीय अस्पताल में घायल युवती का हालचाल जानते रिश्तेदार। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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आजमगढ़ से बेटी सपना को साथ लेकर प्रेमलता बहन कुसुमलता के घर बाबा के दर्शन आई थी। सपना को क्या पता था कि मां के साथ यह उसकी आखिरी यात्रा होगी। घटना में घायल मां को डॉक्टरों ने अस्पताल पहुंचने पर मृत घोषित कर दिया। 

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सपना गंभीर रूप से घायल थी। वह दर्द से कराह रही थी। घटना से डरी, सहमी होने से वह बोल नहीं पा रही थी। आसपास के बेड पर भर्ती लोगों पर जब उसकी नजर जाती थी तो वह मां को ढूंढती रहती थी। जब मां नहीं मिली तो वह घबरा गई। 

कुछ देर बाद पिता आकाश पहुंचे तो उनसे मां के बारे में पूछा। पत्नी को खो देने का गम लिए पिता ने कलेजे पर पत्थर रखकर यहीं कहा कि मां ठीक हैं, उसका दूसरे अस्पताल में इलाज चल रहा है। अस्पताल में मौजूद लोग यह देखकर भावुक हो गए।
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जर्जर मकान के गिरने की आवाज सुनकर आसपास के लोग डर कर घर से बाहर निकल गए। हर कोई जान बचाते हुए सड़क पर आ गया। लोग मलबे में दबे लोगों को बचाने की गुहार लगाते हुए चिल्लाने लगे। 

पुलिस, एनडीआरएफ के जवान भी पहुंच गए। एक-एक कर लोगों को बाहर निकाला गया। अस्पताल पहुंचने पर प्रेमलता को मृत घोषित किया गया तो परिजन रोने लगे। मौत की जानकारी इमरजेंसी वार्ड में बिटिया सपना को नहीं दी गई। 

प्रेमलता की बहन कुसुमलता के साथ-साथ परिवार के अन्य सदस्य भी घायल हो गए। पत्नी की मौत की सूचना पाकर अस्पताल पहुंचे आकाश का रो-रोकर बुरा हाल था। कुछ देर बाद बेटी को दिखाने ले जाया गया। बेटी के पास पहुंचने से पहले पिता ने आंखों के आंसू पोछे। अंदर गए तो बेटी उन्हें देखकर रोने लगी।

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सामाजिक लोगों ने भी अस्पताल में घायलों का जाना हाल। - फोटो : अमर उजाला
मलबे में दबा पूरा परिवार, जवान दिखे तो जगी उम्मीद
घटना में दस लोगों में एक ही परिवार के पांच लोग घायल हो गए। पांचों पांडवा निवासी रमेश गुप्ता, उनकी पत्नी कुसुमलता गुप्ता, बेटी रितिका गुप्ता, बेटा ऋषभ गुप्ता का इलाज मंडलीय अस्पताल में चल रहा है। 

रमेश गुप्ता ने बताया कि जिस समय यह घटना हुई सभी लोग सो रहे थे। जैसे ही मलबा गिरा और नींद खुली तो चिल्लाकर पत्नी और बच्चों को जगाने लगे। देखते देखते सभी लोग मलबे में दब गए। मलबा इतना अधिक था कि दम घुटने लगा। एनडीआरएफ जवान दिखाई दिए तब जाकर जान बचने की उम्मीद जगी।
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