सौर ऊर्जा, बायो गैस जैसे गैर पारंपरिक ऊर्जा स्रोतों के माध्यम से बनारस को साफ-सुथरा, हरा-भरा बनाने की कवायद शुरू हो गई है। इसके लिए बीएचयू को मॉडल बनाने की तैयारी चल रही है। इसी उद्देश्य से गुरुवार को बीएचयू पहुंचे केंद्र सरकार के अधिकारियों ने यहां गैर पारंपरिक ऊर्जा स्रोतों पर हो रहे कार्यों की जानकारी ली।
दो दिवसीय दौरे पर आई टीम के सदस्यों ने कुलसचिव डॉ. नीरज त्रिपाठी सहित अन्य अधिकारियों से मुलाकात की। सदस्यों के मुताबिक काशी को ग्रीन और क्लीन बनाकर अधिक से अधिक गैर पारंपरिक ऊर्जा श्रोतों का प्रयोग करने वाला मॉडल शहर बनाने की दिशा में प्रयास चल रहा है।
इसकी संभावना बीएचयू परिसर में अधिक है। बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मंशा के अनुसार 2022 तक परियोजना मूर्त रूप लेगी। अधिकारियों ने बीएचयू में लगे सोलर पैनल, बायो गैस संयंत्र आदि को देख कर संतोष जताया।
टीम में गैर पारंपरिक ऊर्जा मंत्रालय के उप सचिव रुचिन गुप्ता, यूपी नेडा की निदेशक डॉ. संगीता सिंह, सौर ऊर्जा निगम के महा प्रबंधक रमेश कुमार, उप महाप्रबंधक चंद्र कुमार सिंह, नीति आयोग के उप निदेशक मनोज कुमार के साथ ही सेंट्रल इलेक्ट्रिसिटी अथारिटी, नेशनल थर्मल पावर कार्पोरेशन और गैर पारंपरिक ऊर्जा विकास एजेंसी के अधिकारी मौजूद हैं।
कुलसचिव ने बताया कि सौर ऊर्जा और बायो गैस को बढ़ावा देकर पर्यावरण संरक्षण की दिशा में परिसर में काम हो रहा है। सभी प्रमुख भवनों की छतों पर सोलर पैनल लगाए जा रहे हैं।
1.5 मेगावाट का रूफ पावर प्लान तैयार हो रहा है। वहीं, मिर्जापुर के बरकछा परिसर में सोलर पैनल के जरिए 50 मेगावाट ऊर्जा उत्पादन के लिए सौर उर्जा निगम से समझौता किया गया।