भारत सरकार के राष्ट्रीय सुपर कंप्यूटिंग मिशन से आईआईटी बीएचयू भी जुड़ गया है। देश में 70 शैक्षणिक एवं अनुसंधान, विकास संस्थानों को इस मिशन में शामिल किया गया है। शैक्षणिक संस्थानों में सिर्फ आईआईटी बीएचयू और कानपुर है।
इस मिशन से जुड़ जाने से मौसम की सटीक भविष्यवाणी, दवाओं के निर्माण आदि में मदद मिलेगी। इसके लिए संस्थान में 500 टेराफ्लाप क्षमता का सुपर कंप्यूटर लगाया जाएगा।
केंद्र के इस मिशन से जुड़ने वाले सभी संस्थानों में एक साल के भीतर आप्टिकल फाइबर बिछा कर राष्ट्रीय सुपर कंप्यूटिंग ग्रिड बनाया जाएगा। यह ग्रिड केंद्र सरकार के एक अन्य कार्यक्रम सुपर कंप्यूटर राष्ट्रीय ज्ञान नेटवर्क से जुड़ा रहेगा।
आईआईटी बीएचयू में सुपर कंप्यूटर की सुविधा मिलने से शहर और आसपास के सरकारी और गैर सरकारी शैक्षणिक एवं तकनीकी संस्थानों को भी इसका प्रयोग करने की सुविधा मिलेगी। यहीं नहीं मल्टीनेशनल कंपनियों की मांग के अनुरूप कंप्यूटर विशेषज्ञ तैयार किए जाएंगे।
इसके लिए नया पाठ्यक्रम तैयार किया जाएगा। ऐसे में यह मिशन भावी इंजीनियरों के कॅरियर के नजरिये से बेहद कारगर होगा। वहीं, जलवायु माडलिंग और मौसम की भविष्यवाणी प्रति घंटे के आधार पर हो सकेगी। भूकंप और सुनामी का पूर्वानुमान एवं विश्लेषण भी आसानी से होगा।
साथ ही गंभीर बीमारियों की दवाएं देश में ही निर्मित करने में मदद मिलेगी, जो मरीजों को सस्ते दर पर उपलब्ध होंगी। इतना ही नहीं, ऊर्जा उत्पादन में कोयले की निर्भरता खत्म करने के लिए एटामिक एनर्जी को विकसित करने में सुपर कंप्यूटर बेहद कारगर साबित होगा।
इसी तरह साइबर अपराध पर नियंत्रण और वित्तीय गणना में भी मदद मिलेगी। साथ ही राष्ट्रीय सुरक्षा के मद्देनजर देश की सीमा पर आतंकवाद और घुसपैठ नियंत्रण के लिए सेंसर बनाने में भी यह मददगार साबित होगा।