खेती की आधुनिक तकनीक और तौर-तरीकों की जानकारी के लिए पूर्वांचल और बिहार के किसानों को अब परेशान नहीं होना होगा। बीएचयू के कृषि विज्ञान संस्थान में उन्हें न सिर्फ खेती की नई तकनीकों का प्रशिक्षण दिया जाएगा बल्कि उनके रहने-ठहरने के भी प्रबंध होंगे। इसके लिए हास्टल बनाने की कवायद शुरू हो गई है। कृषि विज्ञान संस्थान ने इसके लिए 11 करोड़ रुपये का प्रस्ताव बनाकर कृषि मंत्रालय को भेज दिया है। इससे उन किसानों को सर्वाधिक सहूलियत होगी जो बीएचयू आकर खेती की नई तकनीक जानना चाहते हैं लेकिन प्रशिक्षण के दौरान बनारस में ठहरने का खर्च वहन कर पाने में वे सक्षम नहीं हैं।
गौरतलब है कि पिछले साल बीएचयू में एक कार्यक्रम में भाग लेने आए केंद्रीय कृषि मंत्री राधा मोहन सिंह ने किसानों के लिए एक हास्टल बनाने की घोषणा की थी और प्रस्ताव बनाकर भेजने को कहा था। कृषि विज्ञान संस्थान के निदेशक प्रो. आरपी सिंह ने बताया कि कृषि फार्म के पास इसका निर्माण कराया जाएगा। किसानों के लिए बनने वाले हास्टल के भवन का नक्शा और आने वाली लागत का प्रस्ताव बनाकर कृषि मंत्रालय को भेजा जा चुका है। इसमें नीचे दो बड़े मल्टीपरपज हाल और 50 कमरे बनाए जाएंगे। मल्टीपरपज हाल में पूर्वांचल और बिहार से आने वाले किसानों को कृषि की उन्नत एवं नई तकनीकों की जानकारी दी जाएगी। साथ ही, उन्हें विभिन्न प्रकार की खेती की तकनीक के बारे में प्रशिक्षित किया जाएगा ताकि उन्हें अधिक से अधिक लाभ मिल सके।
खेती के घटते रकबे को भी ध्यान में रखकर उन्हें प्रशिक्षित किया जाएगा जिससे वे कम खेत में अधिक से अधिक से पैदावार ले सकें और लाभ कमा सकें। दूरदराज से आने वाले किसानों को रहने केलिए हास्टल के दूसरे तल पर कमरों की सुविधा मुहैया कराई जाएगी। ताकि उन्हें ठहरने के लिए भटकना न पड़े। बीएचयू कृषि विज्ञान संस्थान की ओर से समय-समय पर किसानों को प्रशिक्षण दिया जाता है लेकिन जगह के अभाव में कम किसान ही आ पाते हैं। हास्टल बन जाने से किसानों की संख्या तो बढ़ेगी ही उन्हें ठीक से प्रशिक्षण भी दिया जा सकेगा।