अब जिस एआई संचालित डिवाइस का प्रयोग शुरू किया जा रहा है, यह डॉक्टर द्वारा दर्ज की गई जानकारी के आधार पर स्कोरिंग सिस्टम तुरंत विश्लेषित करता है। साथ ही चोट की गंभीरता और मृत्यु की संभावना का अनुमान लगाता है।
ट्रॉमा सेंटर प्रभारी प्रो. सौरभ सिंह का कहना है कि ट्रॉमा केस में गोल्डन ऑवर का बहुत महत्व होता है। यानी चोट लगने के बाद जल्द से जल्द ट्रॉमा पहुंचने पर इलाज मिलना है। पिछले एक महीने से ट्रॉमा सेंटर बीएचयू स्कोरिंग सिस्टम नामक प्रणाली का ट्रायल चल रहा है, जो कि बहुत सफल है।
क्या है स्कोरिंग सिस्टम
बीएचयू ट्रॉमा सेंटर प्रभारी प्रो. सौरभ सिंह का कहना है कि ट्रॉमा सेंटर बीएचयू स्कोरिंग सिस्टम एक ऐसा टूल है, जो मरीजों की ट्रायेज यानी गंभीर स्थिति को तय करता है कि किसे तुरंत गहन चिकित्सा देखभाल में ले जाना चाहिए।
जैसे ही कोई मरीज केंद्र पर पहुंचता है, एक प्रशिक्षित डॉक्टर या डेटा कोऑर्डिनेटर मोबाइल पर टीसीबीएचयू एसएस एप्लिकेशन खोलकर मरीज की स्थिति से जुड़ी जानकारियां दर्ज करता है। इनमें चोट का प्रकार, सांस लेने की प्रक्रिया, ब्लड प्रेशर, रक्तस्राव की स्थिति और अन्य जीवन-निर्देशक संकेत शामिल होते हैं।
जानकारी दर्ज करने के साथ ही सिस्टम तुरंत उसका विश्लेषण कर एक स्कोर तैयार करता है। यह स्कोर चोट की गंभीरता और मृत्यु की संभावना का अनुमान बताता है। आसान शब्दों में कहें तो यह मेडिकल टीम को बता देता है कि कई मरीजों में से किसे तत्काल आईसीयू में भर्ती करना ज़रूरी है।
कई मरीज एक साथ आने पर सबसे बड़ा सहारा
ट्रॉमा सेंटर में शुरू की गई यह तकनीक उस समय और सहायक होती है, जब सड़क हादसों या किसी सामूहिक दुर्घटना में एक साथ कई मरीज पहुंच जाते हैं। हर मरीज का डेटा अलग-अलग पेज पर भर दिया जाता है। अब चंद सेकंड में सिस्टम सभी एंट्री का विश्लेषण कर बता देता है कि किसकी हालत सबसे नाजुक है। इससे संसाधनों का सही आवंटन होता है और सबसे गंभीर मरीज को प्राथमिकता से गहन चिकित्सा मिलती है।