सीटें सीमित होने और अभ्यर्थियों की साल दर साल बढ़ती संख्या के चलते बीएचयू में दाखिले की जंग कठिन होती जा रही है। बीएचयू की बढ़ती साख और विश्वविद्यालय के शताब्दी वर्ष ने देश ही नहीं विदेश के विद्यार्थियों का भी ध्यान खींचा है। इस बार करीब चार लाख अभ्यर्थी अपनी किस्मत आजमाएंगे। आवेदकों की यह संख्या पिछले साल के मुकाबले 26 हजार ज्यादा है।
बीएचयू में इस बार स्नातक और स्नातकोत्तर के सौ से अधिक पाठ्यक्रमों की प्रवेश परीक्षा के लिए इतने 3,80,900 आवेदन आए हैं। पिछले तीन सालों का आंकड़ा देखें तो पता चलेगा कि किस औसत पर अभ्यर्थियों की खासी संख्या बढ़ रही है। सत्र 2015-16 में 3.55 लाख, सत्र 2014-15 में 3.20 लाख और सत्र 2013-14 में 2.80 लाख अभ्यर्थियों ने आवेदन किया था। हर साल आवेदनों की संख्या बढ़ रही है लेकिन सीटें नहीं बढ़ीं।
स्नातक और स्नातकोत्तर के किसी भी पाठ्यक्रम में पिछले पांच सालों से सीटें नहीं बढ़ाई गईं हैं। संबद्ध कालेज की भी यही हालत है। बीएचयू मुख्य परिसर, दक्षिणी परिसर बरकछा और चार संबद्ध कालेजों में स्नातक, स्नातकोत्तर की 10,500 से अधिक सीटें हैं। ऐसे में मई से शुरू होने वाली प्रवेश परीक्षाओं में अभ्यर्थियों के बीच कड़ी टक्कर होगी।