बीएचयू के प्रोफेसर रहे पंडित ओंकारनाथ ठाकुर
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वंदे मातरम का एक सबसे बड़ा संबंध बीएचयू से भी रहा है। स्वतंत्र भारत में पहली बार बीएचयू के प्रोफेसर रहे पंडित ओंकारनाथ ठाकुर ने 10 मिनट तक वंदे मातरम गाया और आजाद भारत की पहली हवा में अलसुबह 6.30 बजे इसका प्रसारण किया गया। भारत के स्वतंत्रता पर संसद भवन में मध्यरात्रि पर 14 और 15 अगस्त के बीच आजादी का उत्सव मनाने के लिए एक कार्यक्रम रखा गया।
सरदार वल्लभभाई पटेल ने बीएचयू के संगीत एवं मंच कला संकाय के संस्थापक रहे पं. ओंकारनाथ ठाकुर (जो उस दौरान चेन्नई में थे) को वायरलेस संदेश भेजकर संसद में वंदे मातरम गाने का अनुरोध किया। इस पर पं. ओंकारनाथ ने जवाब दिया कि वे वंदे मातरम के पूरे 22 पंक्तियों वाले रूप को ही गाएंगे। उनकी ये शर्त सरदार पटेल ने स्वीकार कर ली। आज सड़क से संसद तक राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम की गूंज है।
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गीत के 150वें वर्ष पर संसद में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा- वंदे मातरम राष्ट्र के प्रति समर्पण का माध्यम आजादी के आंदोलन में भी था, आज भी है और 2047 में विकसित भारत के निर्माण के समय भी रहेगा। वहीं, कांग्रेस पर आरोप लगाया कि उसने वंदे मातरम के दो टुकड़े कर दिए। पूरी भाजपा सरकार ही इस पर कांग्रेस को घेर रही है।