फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

BHU: बीएचयू में पहली बार छात्र सीख रहे ड्रोन, एआई से फिल्म मेकिंग; दो शॉर्ट फिल्मों का भी करेंगे निर्माण

Tue, 07 Apr 2026 03:49 PM IST
Pragati Chand अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।

सार

Varanasi News: बीएचयू में डिजिटल फिल्म निर्माण की ट्रेनिंग दी जा रही है। इसमें पहली बार छात्र- छात्राएं ड्रोन, एआई से फिल्म मेकिंग सीख रहे हैं। प्रशिक्षण लेने के बाद सभी छात्र-छात्राएं दो शॉर्ट फिल्मों का भी निर्माण करेंगे।
विज्ञापन
बीएचयू में हुई कार्यशाला में शामिल विद्यार्थी व शिक्षक - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

बीएचयू में पहली बार छात्र और छात्राओं को ड्रोन और एआई का इस्तेमाल कर डिजिटल फिल्म निर्माण की ट्रेनिंग दी जा रही है। करीब 75 छात्र-छात्राएं ड्रोन और एआई टूल्स का व्यावहारिक प्रशिक्षण पाकर दो शॉर्ट फिल्मों का निर्माण भी करेंगे। सोमवार को इस विषय पर दो दिन की कार्यशाला शुरू हुई। 

विज्ञापन


कला संकाय के प्रेमचंद सभागार में पत्रकारिता और जन संप्रेषण विभाग और भारत वैभव की ओर से ये कार्यशाला कराई जा रही है। मुख्य अतिथि एपीजे इंस्टिट्यूट ऑफ मास कम्युनिकेशन के निदेशक प्रो. सजल मुखर्जी ने कहा कि आज मीडिया और फिल्म निर्माण की दुनिया में कई अविश्वसनीय बदलाव देखने को मिल रहे हैं। 

पहले कभी कंटेंट केवल रचनात्मकता पर आधारित होता था, वहीं अब यह डेटा, रिसर्च और दर्शकों की मनोविज्ञान की गहरी समझ पर टिका है। डिजिटल युग में ड्रोन और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसी तकनीकों ने कहानी कहने के तरीके को पूरी तरह बदल दिया है।
विज्ञापन

 
विशिष्ट अतिथि बीएचयू के छात्र अधिष्ठाता डॉ. रंजन कुमार सिंह ने कहा कि इस तरह की कार्यशालाएं विद्यार्थियों कॅरिअर के लिए बहुत उपयोगी हैं। इससे उन्हें सैद्धांतिक ज्ञान के साथ-साथ व्यावहारिक अनुभव भी मिलेगा। छात्र नई और उभरती तकनीकों के प्रति जागरूक हों और उन्हें अपने कार्यक्षेत्र में अपनाएं। ड्रोन और एआई जैसे टूल्स भविष्य की जरूरत हैं, और इनका ज्ञान छात्रों को प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त देगा।

Trending Videos
विज्ञापन

तकनीका का सही दिशा में इस्तेमाल, बढ़ाएगा छात्रों की क्षमता

मुख्य वक्ता डीएलआई पानीपत की प्रशिक्षण निदेशक प्रो. प्रेरणा डावर सलूजा ने कहा कि हम ऐसे दौर में हैं, जहां तकनीक ही विकास का आधार बन चुकी है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस शिक्षा, रोजगार और स्टार्टअप के क्षेत्र में नए अवसर पैदा कर रहा है। यदि युवा इन तकनीकों को सही दिशा में उपयोग करें तो वे न केवल अपनी क्षमताओं को बढ़ा सकते हैं, बल्कि देश के विकास में भी योगदान दे सकते हैं।

कला संकाय की प्रमुख प्रो. सुषमा घिल्डियाल ने कहा कि आज का दौर केवल पारंपरिक शिक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि बहुआयामी कौशल विकास की मांग करता है। यदि हमें भारत को ‘विश्वगुरु’ बनाना है तो इसकी शुरुआत काशी और बीएचयू से ही होनी चाहिए। संयोजक डॉ. बाला लखेंद्र ने सभी विशेषज्ञों का स्वागत कर कार्यशाला की रूपरेखा बताई। सह-संयोजक डॉ. धीरेंद्र राय ने धन्यवाद ज्ञापित किया। इस दौरान आयोजन सचिव डॉ शैलेंद्र कुमार सिंह, कार्यशाला एक्सपर्ट डॉ. नवीन गौतम, डॉ. अंकित कुमार मलयन और डॉ. मुदिता राज ने कार्यशाला के तकनीकी पक्षों पर जानकारियां दी।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें