मुख्य वक्ता डीएलआई पानीपत की प्रशिक्षण निदेशक प्रो. प्रेरणा डावर सलूजा ने कहा कि हम ऐसे दौर में हैं, जहां तकनीक ही विकास का आधार बन चुकी है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस शिक्षा, रोजगार और स्टार्टअप के क्षेत्र में नए अवसर पैदा कर रहा है। यदि युवा इन तकनीकों को सही दिशा में उपयोग करें तो वे न केवल अपनी क्षमताओं को बढ़ा सकते हैं, बल्कि देश के विकास में भी योगदान दे सकते हैं।
कला संकाय की प्रमुख प्रो. सुषमा घिल्डियाल ने कहा कि आज का दौर केवल पारंपरिक शिक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि बहुआयामी कौशल विकास की मांग करता है। यदि हमें भारत को ‘विश्वगुरु’ बनाना है तो इसकी शुरुआत काशी और बीएचयू से ही होनी चाहिए। संयोजक डॉ. बाला लखेंद्र ने सभी विशेषज्ञों का स्वागत कर कार्यशाला की रूपरेखा बताई। सह-संयोजक डॉ. धीरेंद्र राय ने धन्यवाद ज्ञापित किया। इस दौरान आयोजन सचिव डॉ शैलेंद्र कुमार सिंह, कार्यशाला एक्सपर्ट डॉ. नवीन गौतम, डॉ. अंकित कुमार मलयन और डॉ. मुदिता राज ने कार्यशाला के तकनीकी पक्षों पर जानकारियां दी।