इस बीच 15 फरवरी को उसकी मौत हो गई थी। शिवकुमार के पिता ने पहले अधिकारियों से न्याय की गुहार लगाई, न्याय नहीं मिला तो हाईकोर्ट में याचिका दायर की। हाईकोर्ट ने कई बार पुलिस अधिकारियों को तलब कर जानकारी भी मांगी। प्राथमिक जांच में पुलिसकर्मियों की लापरवाही सामने आई है।
बीएचयू में बीएससी के छात्र शिव कुमार त्रिवेदी की मौत के मामले में कार्रवाई होने में करीब डेढ़ साल बीत गए। शिवकुमार के पिता प्रदीप कुमार भी न्याय के लिए थाने का चक्कर लगाते रहे, वहीं बीएचयू के छात्रों ने भी आवाज उठाई। अब 8 पुलिसकर्मियों पर मुकदमा दर्ज होने के बाद शिव के पिता के साथ ही आंदोलनरत छात्राें में न्याय की आस जगी है।
छित्तूपुर स्थित एक लॉज में किराए पर कमरा लेकर पढ़ाई करने वाले छात्र शिवकुमार त्रिवेदी के लापता होने के बाद छात्रों ने भी दोषियों पर कार्रवाई करने के लिए आंदोलन किया था। अधिवक्ता सौरभ तिवारी ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में याचिका दायर की। इस पर हाईकोर्ट के आदेश पर सीबीसीआईडी ने जांच शुरू की। इधर शिव के पिता सीबीसीआईडी अफसरों के साथ रामनगर थाने में पहुंचे। यहां 15 फरवरी 2020 को यमुना पोखरी में शव मिलने की जानकारी मिली। जब डीएनए रिपोर्ट आई तो शिव की मौत की पुष्टि हुई।