वाराणसी के बीएचयू में दो दिन पहले 12 मार्च को एक छात्र पर बाहरी युवकों द्वारा मारपीट का मामला सामने आया था। आक्रोशित छात्रों ने धरना देते हुए चीफ प्रॉक्टर को इस घटना के लिए जिम्मेदार ठहराया। उसी दिन पत्रकार से मारपीट के मामले में फंसी बीएचयू की चीफ प्रॉक्टर का नाम गुरुवार को एक बार फिर चर्चा में आ गया। बीएचयू के एक छात्र ने चीफ प्रॉक्टर के खिलाफ लंका थाने में लिखित तहरीर दी है।
छात्र ने लंका पुलिस को दी हुई तहरीर में बताया कि वह बीएचयू में बीए प्रथम वर्ष का छात्र है और दिव्यांग है। 12 मार्च को हुए बवाल के बाद रात में चीफ प्रॉक्टर रोयाना सिंह एक दर्जन से अधिक सुरक्षाकर्मियों के साथ बिड़ला हॉस्टल में तलाशी लेने पहुंचीं। सभी गार्ड छात्रों के कमरे जबरदस्ती खुलवा कर उनके कमरों की तलाशी ले रहे थे।
इसी दैरान छात्र किताब लेकर बरामदे में पढ़ाई कर रहा था। उसे देखते ही चीफ प्रॉक्टर रोयाना सिंह अपशब्दों का इस्तेमाल करते हुए कही कि इसे पकड़ो ये बाहरी छात्र है। चीफ प्रॉक्टर के इतना कहते ही दर्जन भर गार्ड छात्र पर टूट पड़े और उसको पीटते हुए उसकी आंख फोड़ने की धमकी देने लगे। इसके बाद छात्र का आई कार्ड भी छीन लिए।
आरोप है कि चीफ प्रॉक्टर रोयाना सिंह ने छात्र को निलंबित करने की धमकी दी। लिखित तहरीर के जरिए छात्र चीफ प्रॉक्टर समेत एक दर्जन से अधिक सुरक्षाकर्मियों पर मुकदमा दर्ज करने की पुलिस से अपील किया। इस मामले में लंका पुलिस का कहना है कि छात्र द्वारा मिले तहरीर के आधार पर पुलिस प्रकरण की जांच कर रही है।