न्यूक्लियर एनर्जी (नाभिकीय ऊर्जा) के क्षेत्र में जापान के साथ मिलकर बीएचयू शिक्षण और शोध को आगे बढ़ाएगा।
मेडिकल साइंस, खासतौर से कैंसर के उपचार में भी बीएचयू जापान की मदद लेने जा रहा है।
इसके लिए बीएचयू और द हाई एनर्जी एक्सेलरेटर रिसर्च आर्गेनाइजेशन (केईके) जापान के बीच सोमवार को समझौता हुआ। केंद्रीय कार्यालय में सोमवार को कुलपति प्रो. जीसी त्रिपाठी की उपस्थिति में एमओयू पर कुलसचिव डॉ. केपी उपाध्याय और केईके के डायरेक्टर जनरल प्रो. मासानोरी यामाउची ने हस्ताक्षर किए।
समझौते के तहत दोनों संस्थान न्यूक्लियर साइंस, मैटेरियल साइंस, केमिकल साइंस समेत बायोलॉजिकल साइंस पर मिलकर शोध करेंगे। एमओयू के तहत ही बीएचयू में लीनियर एक्सेलरेटर लैब भी स्थापित किया जाएगा।
इससे मेडिकल साइंस खासतौर पर कैंसर रोगियों के उपचार में मदद मिलेगी। समझौता पत्र पर हस्ताक्षर के समय केईके के यूनिवर्सिटी रिसर्च एडमिनिस्ट्रेटर प्रो. जुनीजी गुराकावा, मिसा मियाई, आईआईटी मुंबई के भौतिकी विभाग के प्रो. आर वर्मा, विज्ञान संस्थान के निदेशक प्रो. बच्चा सिंह, भौतिकी विभाग के हेड प्रो. आरपी मलिक, प्रो. बीके सिंह, डॉ. वैंकटेश सिंह समेत छात्र अधिष्ठाता प्रो. एमके सिंह, अंतरराष्ट्रीय केंद्र के चेयरमैन प्रो. एचबी श्रीवास्तव, समन्वयक प्रो. एपी सिंह मौजूद रहे।
इससे पहले भी बीएचयू ने जापान के कई शैक्षणिक संस्थानों के साथ समझौते किए हैं।