Varanasi News: जानलेवा हमले में घायल बीएचयू साउथ कैंपस के छात्र की ट्रॉमा सेंटर में मौत हो गई। घटना से परिवार में कोहराम मच गया। 12 जून 2024 की शाम को मिर्जापुर जिले के बरकछा में दो बाइक की टक्कर के बाद छात्र गुट भिड़े थे। इसी दौरान छात्र घायल हुआ था।
मिर्जापुर के बरकछा स्थित बीएचयू के साउथ कैंपस में जानलेवा हमले में घायल छात्र नितेश पांडेय उर्फ कुश (22) की उपचार के दौरान बीएचयू ट्रॉमा सेंटर में शुक्रवार को मौत हो गई। सूचना पाकर लंका थाने की पुलिस ने शव का पोस्टमार्टम कराया। इससे पहले नितेश का नौ महीने 15 दिन तक उपचार चला। जानलेवा हमले की वजह दो बाइक की टक्कर थी।
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कोतवाली थाना क्षेत्र के दारानगर निवासी व्यवसायी शशिकांत पांडेय और नीलम पांडेय के दो पुत्रों में छोटा नितेश बीएचयू के साउथ कैंपस में बी-वोक का छात्र था। नितेश बॉडी बिल्डिंग और मॉडलिंग का शौकीन था। जून 2024 में नितेश फाइनल ईयर का पेपर दिया था। 12 जून 2024 की शाम बीएचयू के साउथ कैंपस में नितेश की बाइक और अमन यादव की बाइक में टक्कर हो गई थी। इसे लेकर नितेश व उसके परिचित विंध्याचल हॉस्टल के छात्र और अमन व उसके परिचित शिवालिक हॉस्टल के छात्र डंडा-लाठी, पत्थर और हथौड़ी लेकर आपस में भिड़ गए थे।
जमकर हुई मारपीट में नितेश और मयंक कुमार गंभीर रूप से घायल हुए थे। नितेश को साउथ कैंपस स्थित हेल्थ सेंटर से उपचार के लिए एंबुलेंस से अस्पताल भेजा जा रहा था, उस दौरान उस पर छात्रों के गुट ने दोबारा हमला किया था।
मामले को लेकर बीएचयू साउथ कैंपस के सुरक्षा सुपरवाइजर असगर अली की तहरीर पर मिर्जापुर के देहात कोतवाली थाने में 12 नामजद और अन्य अज्ञात के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया था। इसके साथ ही नितेश को उपचार के लिए बीएचयू ट्रॉमा सेंटर में भर्ती कराया गया।
23 जनवरी को हुआ था डिस्चार्ज, फिर हुआ भर्ती
शशिकांत पांडेय ने बताया कि निशांत के सिर पर गंभीर चोट लगी थी। स्वास्थ्य में हल्का सुधार होने पर गत 23 जनवरी को डॉक्टरों ने उसे डिस्चार्ज कर दिया था। हालांकि वह घर जाकर भी परिजनों पर ही आश्रित था और उसकी सुध-बुध खोई हुई थी। बीच में उसे ट्रॉमा सेंटर लाकर डॉक्टरों को दिखाते रहे। 26 मार्च को नितेश की स्थिति असामान्य प्रतीत हुई और उसके सिर व सीने पर लगी नली भी बदलवानी थी। इसलिए उसे ट्रॉमा सेंटर लाकर भर्ती कराया गया। उपचार के दौरान शुक्रवार की सुबह उसकी मौत हो गई।
10 महीने तक मर-मर के जिये... बाबू छोड़ कर चल दिए
बीएचयू ट्रॉमा सेंटर में नितेश की मां नीलम पांडेय की हालत बेसुधों जैसी थी। परिजन बड़ी ही मुश्किल से उन्हें संभाले हुए थे। वह बार-बार यही कह रही थी कि 10 महीने तक हम मर-मर कर जिये... फिर भी हमारे बाबू हमें छोड़ कर चल दिए। वहीं, परिजनों ने बताया कि जब से नितेश ट्रॉमा सेंटर में भर्ती हुआ था, उसके मां-बाप ने भूख-प्यास और नींद की परवाह छोड़ दी थी। दंपती बस यही प्रार्थना करते थे कि उनका बेटा फिर से अपने पैरों पर खड़ा हो जाए, लेकिन नियति ने कुछ और ही निर्धारित कर रखा था।
फिलहाल क्या कहें, क्रिया-कर्म से खाली होकर देखेंगे
नितेश के परिजनों ने बताया कि उस पर हमला करने वाले छात्र जमानत पर जेल से बाहर हैं। फिलहाल नितेश के शव की अंत्येष्टि और त्रयोदशाह तक के क्रिया-कर्म को संपन्न कराना है। इसके बाद अपने लड़के को न्याय दिलाने के लिए लड़ेंगे। उधर, मिर्जापुर के सीओ सदर अमर बहादुर ने कहा कि घटना के संबंध में जो तहरीर मिली थी उसके आधार पर मुकदमा दर्ज किया गया था। आरोपी छात्रों को गिरफ्तार कर जेल भी भेजा गया था। घायल छात्र की मौत की सूचना थाने पर प्राप्त होने पर मुकदमे में धाराएं बढ़ा कर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।