देश में कोरोना संक्रमण के वास्तविक मामले आधिकारिक मामलों से 17 गुना ज्यादा रहे। बीएचयू समेत 34 संस्थानों के 88 वैज्ञानिकों के अध्ययन में यह तथ्य सामने आया है। टीम ने सितंबर-दिसंबर 2020 में छह राज्यों के चौदह जिलों में 2301 लोगों का सीरो सर्वे यानी एंटीबॉडी परीक्षण किया था। उसकी रिपोर्ट आने के बाद अब उसका प्रकाशन विज्ञान की विशिष्ट पत्रिका इंटरनेशनल जनरल आफ इंफेक्शंस डिजीजेज में प्रकाशित हुआ है।
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कोरोना संक्रमण के दौर में बीएचयू समेत अन्य शोध संस्थानों में वैज्ञानिकों ने शोध किया। बीएचयू के जीन विज्ञानी प्रोफेसर ज्ञानेश्वर चौबे के नेतृत्व में हुए अध्ययन में ऐसे लोगों को शामिल किया, जो कि बिना किसी लक्षण के कोरोना संक्रमित हुए। ऐसे लोगों की संख्या 26 से 34 वर्ष थी। प्रो. ज्ञानेश्वर चौबे का कहना है कि कोरोना की लहर में एंटीबाडी की जांच वास्तविक संक्रमण की सटीक जानकारी के लिए जरूरी होता है। इसको देखते हुए चौदह जिलों से शहरी इलाकों से हर दिन भीड़भाड़ वाले स्ट्रीट वेंडर्स का सैंपल लिया गया। प्रो. ज्ञानेश्वर चौबे ने बताया कि छत्तीसगढ़ राज्य के रायपुर जिले में एंटीबॉडी-पॉजिटिव लोगों का न्यूनतम अनुपात देखा गया, जबकि यूपी के गाजीपुर जिले में अधिक पाया गया। शोध के अनुसार आधिकारिक और संभावित आंकड़ों में अंतर बिना लक्षण वालों के मामलों की अधिक संख्या होने के कारण थी।