क्या यह शब्द संविधान में दर्ज है : प्रो. हेरंब
इलाहाबाद विश्वविद्यालय के इतिहासकार प्रो. हेरंब चतुर्वेदी के अनुसार, क्या यह शब्द संविधान में दर्ज है, जिससे लोगों को दूर रहना है? इसे प्राचीन इतिहास पर थोप देना उचित नहीं है। इस तरह का सवाल ही नहीं होना चाहिए। इतिहासकार योगेंद्र सिंह इसे संस्कृतिकरण कहते हैं। ब्राह्मणवाद शब्द को मध्यकाल के कवियों ने ध्वस्त कर दिया है।
90 के दशक में प्रचलित हुआ यह शब्द : प्रो. अनुराधा सिंह
इतिहास विभाग की प्रो. अनुराधा सिंह के अनुसार, शब्द कालखंड, स्थान और परिस्थितियों के अनुसार बदलते रहते हैं। ब्राह्मणवादी पितृसत्ता जैसा शब्द 90 के दशक में प्रचलित होना शुरू हुआ था। प्राचीन काल में महिलाओं की क्या स्थिति थी, उसका आकलन अब करना उचित नहीं है। प्राचीन काल में यदि कहीं महिलाओं की स्थिति खराब थी, तो उससे पूरे भारतवर्ष का मूल्यांकन नहीं करना चाहिए।
सिलेबस से होगी पुष्टि : प्रो. प्रवेश भारद्वाज
हाल ही में इतिहास विभाग के अध्यक्ष बने प्रो. प्रवेश भारद्वाज ने कहा कि सिलेबस देखने के बाद ही इसकी पुष्टि की जा सकती है, हालांकि मैं प्राचीन इतिहास का विशेषज्ञ हूं और यह पेपर आधुनिक इतिहास का है।
उस पेपर के अन्य सवाल
वैकल्पिक सेक्शन में पूछा गया कि मुगलकालीन भारत में हरमों की क्या भूमिका थी। गेरडा लर्नर की किताब ‘क्रिएशन ऑफ पितृसत्ता’ के मुख्य तर्क क्या थे। यह किताब मेसोपोटामिया में महिलाओं की प्रताड़ना से जुड़ी है।
दीर्घ उत्तरीय सेक्शन में पूछा गया कि औपनिवेशिक काल यानी अंग्रेजी शासन में भारतीय महिलाओं के लिए किस प्रकार के अलग-अलग शैक्षिक अवसर खुले। ये उनके निजी और सार्वजनिक जीवन के अंतर को तोड़ने में कितने प्रभावी थे।
निर्धारित पाठ्यक्रम के दायरे में पूछा सवाल: बीएचयू
इस मामले में विश्वविद्यालय प्रशासन ने आधिकारिक बयान जारी करते हुए कहा है कि यह प्रश्न परीक्षा के निर्धारित पाठ्यक्रम के दायरे में ही पूछा गया है और शैक्षणिक परिप्रेक्ष्य में प्रस्तुत किया गया है। इस संबंध में किसी भी प्रकार के विवाद को जन्म देना उचित नहीं है।