प्रो. परिमल दास ने कहा कि शोध में भाग लेने वाले परिवारों को निशुल्क आनुवंशिक परीक्षण, परामर्श और निदान-पश्चात विशेषज्ञ चिकित्सकीय सलाह का लाभ मिला है। 2023 से अब तक वाराणसी और आसपास के जिलों में दुर्लभ आनुवंशिक रोगों पर पांच जागरुकता कार्यक्रम भी आयोजित किए गए हैं, जिनका उद्देश्य आनुवंशिक रोगों के प्रति आम समुदायों को अवगत करना, आनुवंशिक विकारों से जुड़ी भ्रांतियों को दूर करना है। इसके अतिरिक्त, यह परियोजना जनसंख्या स्तर पर दुर्लभ बाल्यकालीन विकारों के आनुवंशिक कारणों के बारे में जानकारी दी जा रही है।
100 डॉक्टरों, पैरामेडिकल स्टाफ को दिया गया प्रशिक्षण
प्रो. परिमल दास ने बताया कि डॉक्टरों, रेजिडेंट्स और नर्सिंग स्टाफ सहित 100 से अधिक स्वास्थ्यकर्मियों को प्रशिक्षण दिया गया है। शोधकर्ता डॉ. ऋतु दीक्षित और दीपिका मारू 2024 से मरीजों का पंजीकरण, परामर्श, जेनेटिक डेटा विश्लेषण और वाराणसी में जागरूकता के लिए निरंतर अथक प्रयास कर रही हैं।
कार्यक्रम के सह-प्रधान अन्वेषक डॉ. अशोक कुमार ने कहा किसी दुर्लभ विकार के आनुवंशिक आधार की पुष्टि होने से माता-पिता के मन में अनिश्चितता खत्म होती है और उन्हें अपने बच्चे में रोग के वास्तविक कारण के बारे में पता चलता है। सही निदान के अभाव में वे अनेक चिकित्सकों के पास जाते हैं। बहुत अधिक धन और समय व्यय करते हैं। सही निदान उन्हें भविष्य में गर्भधारण की योजना बनाने में भी सहायता करता है।