बीएचयू में महामना पंडित मदन मोहन मालवीय कैंसर हास्पिटल एंड रिसर्च सेंटर का निर्माण ही नहीं, संचालन भी बिल्कुल टाटा मेमोरियल कैंसर हास्पिटल (टीएमसी) की तर्ज पर होगा। इसका संचालन टीएमसी ही करेगा। टीएमसी की ही तरह यहां कैंसर का इलाज पूरी तरह मुफ्त होगा।
इससे न सिर्फ वाराणसी और पूर्वांचल बल्कि आसपास के प्रांतों के हजारों गरीब मरीजों को बड़ी राहत और सहूलियत होगी। एक तो उन्हें मुंबई तक की दौड़ नहीं लगानी होगी, दूसरे यहां कैंसर की अंतरराष्ट्रीय स्तर की सभी चिकित्सा सुविधाएं एक ही जगह मुहैया होंगी।
टीएमसी के डॉ. केएस शर्मा ने बताया कि टीएमसी मुंबई में हर साल करीब 60 हजार नए कैंसर के मरीज आते हैं। वहीं छह से सात लाख मरीज फॉलोअप के लिए आते हैं। टीएमसी में 60 फीसदी मरीजों का इलाज पूरी तरह मुफ्त होता है।
40 फीसदी पेड मरीज वो होते हैं, जो अलग से सुविधाओं की मांग करते हैं। महामना कैंसर हास्पिटल का संचालन भी टीएमसी करेगा, इसलिए मुंबई जैसी सभी सुविधाएं और सहूलियतें यहां भी मुहैया होंगी।
उन्होंने बताया कि मुंबई में यूं तो देश भर से कैंसर मरीज आते हैं लेकिन इनमें ज्यादातर मरीज यूपी, बिहार और झारखंड से होते हैं। ऐसे में बीएचयू में इस कैंसर हास्पिटल के शुरू होने से पूर्वी उत्तर प्रदेश के लोगों को फायदा होगा। साथ ही, टीएमसी का दबाव भी कम होगा।
बीएचयू के सर सुंदरलाल अस्पताल के एमएस डॉ. ओपी उपाध्याय ने बताया कि एमओयू के तहत टीएमसी के विशेषज्ञों की देखरेख में यहां साल भर के अंदर ओपीडी शुरू हो जाएगी। जब नया अस्पताल बनकर तैयार हो जाएगा तो इसे वहां शिफ्ट कर दिया जाएगा। आईएमएस के रेडियोडायग्नोसिस एंड इमेजिंग, रेडियोथेरेपी एंड रेडिएशन मेडिसिन और सर्जिकल आंकोलॉजी विभाग नए कैंसर अस्पताल में शिफ्ट होंगे।