वैद्य सुशील कुमार दुबे ने बताया कि यह पहला अंतरविषयी अध्ययन है जो कोरोना वायरस के मामले में सुंठी की चिकित्सा और प्रभाव पर प्रारंभिक परिणाम देता है। इसके अध्ययन के लिए शहर के कोविड-19 के अस्पतालों में भर्ती कोरोना वायरस के संक्रमित रोगियों, घर के सदस्यों और स्वास्थ्यकर्मियों समेत 800 लोगों को चुना गया। अध्ययन में बहु-केंद्रीय, नॉन-रैंडमाइज्ड, ओपन-लेवल, सिंगल-आर्म, प्री-पोस्ट डिजाइन का उपयोग किया गया।
उन्होंने 15 दिनों तक सुंठी पाउडर का चार बार रोजाना सेवन किया। दो बार मौखिक रूप से (2 ग्राम) और दो बार नासिका से (0.5 ग्राम)। उनका 15, 30 और 90 दिनों के बाद अध्ययन किया गया। परिणाम बेहद चौंकाने वाले थे। सुंठी चूर्ण का सेवन करने वाले मरीजों में अदरक में पाए जाने वाले फाइटोकेमिकल्स ने कोविड-19 का प्रसार रोक दिया। इसके साथ ही यह कोविड के लक्षण और प्रसार को कम करने में भी मददगार साबित हुआ।
शोधकर्ताओं की टीम की टीम में वैद्य सुशील कुमार दुबे (आयुर्वेद संकाय, चिकित्सा विज्ञान संस्थान, बीएचयू), डॉ. विश्वंभर सिंह, डॉ. यामिनी भूषण त्रिपाठी, डॉ. रामेश्वर नाथ चौरसिया, डॉ. परमेश्वरप्पा एस ब्याडगी, डॉ. नम्रता जोशी, डॉ. तेज बाली सिंह, अमित कुमार, अनामिका यादव (आईएमएस बीएचयू से), डॉ. राजीव मिश्रा (विज्ञान संस्थान, बीएचयू), ऐश्वर्या जायसवाल (मनोविज्ञान विभाग, बीएचयू), डॉ. सुनील कुमार मिश्रा (आईआईटी बीएचयू) और डॉ. हितेश जानी (गुजरात आयुर्वेद विश्वविद्यालय) से शामिल हैं।