फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

बीएचयू शोध छात्र का दर्द: पीएचडी निदेशक कहते थे अपशब्द, घर के काम का बनाते थे दबाव, खुदकुशी से दोस्तों ने रोका

Fri, 28 Jul 2023 02:24 AM IST
उत्पल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी

सार

बीएचयू भूभौतिकी विभाग के शोध छात्र ने वीडियो जारी कर दर्द साझा किया। कहा कि मेरे पीएचडी सुपरवाइजर  उससे अपने निजी कार्य कराते थे और जूनियरों के सामने उसे नीचा दिखाया जाता था। इतना उत्पीड़न किया कि उसने खुदकुशी का ख्याल आने लगा था। 
विज्ञापन
काशी हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) में भूभौतिकी विभाग के शोध छात्र ने अपने सुपरवाइजर पर मानसिक प्रताड़ना के आरोप लगाए हैं। शोध छात्र ने सोशल मीडिया पर वीडियो जारी कर आपबीती बताई। छात्र ने वीडियो में कहा है कि मेरे पीएचडी सुपरवाइजर अपशब्द कहते थे और घर का काम करने का दबाव बनाते थे।

विज्ञापन


शोध छात्र दीपांकर घोष ने सोशल मीडिया पर बुधवार रात तीन मिनट 45 सेकेंड का वीडियो जारी किया। बताया कि शोध निदेशक उसे प्रताड़ित करते थे। जिसकी वजह से वह अवसाद में चला गया था। उसे अपशब्द बोले जाते थे। शोध निदेशक उससे अपने निजी कार्य कराते थे और जूनियरों के सामने उसे नीचा दिखाया जाता था।
ये भी पढ़ें: 'सरकार कर रही साजिश, मैं डरने वाला नहीं', जमानत पर जेल से बाहर आते ही अफजाल अंसारी ने भरी हुंकार

कॅरिअर चौपट करने की धमकी देने का भी आरोप

दिवाली के बाद वह घर से भागकर आत्महत्या करने जा रहा था, लेकिन दोस्तों ने उसे समझाया। दीपांकर ने बताया कि उसे गायन और नृत्य का शौक है। ऐसे में शोध निदेशक उसे अपशब्द कहकर पुकारते थे। दीपांकर ने शोध निदेशक पर कॅरिअर चौपट करने की धमकी देने का भी आरोप लगाया। उसने तत्कालीन विभागाध्यक्ष से शोध निदेशक की शिकायत की, लेकिन उसे दरकिनार कर दिया गया। दीपांकर ने कहा कि निदेशक पर कार्रवाई नहीं की गई तो वह और छात्रों की जिंदगी बर्बाद करते रहेंगे।

विज्ञापन

मेरे पास आत्महत्या के अलावा कोई रास्ता नहीं बचा था

दीपांकर ने आरोप लगाया कि शोध निदेशक और पूर्व विभागाध्यक्ष ने साजिश रचकर बिना नोटिस पीएचडी कैंसिल कर दी। अक्तूबर 2022 तक विभाग में रोज आता था, लेकिन प्रताड़ित किया जाता था। जिसकी वजह से बीमार हो गया। बाद में विभाग गया तो बताया गया कि मेरी पीएचडी कैंसिल कर दी गई है। इसके बाद मेरे पास आत्महत्या के अलावा कोई रास्ता नहीं बचा था।
विज्ञापन

पीएचडी निदेशक बोले- सारे आरोप निराधार

पीएचडी निदेशक प्रो. उमाशंकर ने कहा कि शोध छात्र के सारे आरोप निराधार हैं। वह दो महीने तक गायब था। उसे मेल भेजकर सूचित किया गया, लेकिन कोई जवाब नहीं दिया। नियमानुसार दो महीने अनुपस्थित होने के कारण उसका पंजीकरण निरस्त हो गया। विभागाध्यक्ष प्रो. जीपी सिंह ने कहा कि मैंने मई में कार्यभार ग्रहण किया है। शोध छात्र ने मुझे इस तरह की कोई शिकायत नहीं दी।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें