दीपांकर ने आरोप लगाया कि शोध निदेशक और पूर्व विभागाध्यक्ष ने साजिश रचकर बिना नोटिस पीएचडी कैंसिल कर दी। अक्तूबर 2022 तक विभाग में रोज आता था, लेकिन प्रताड़ित किया जाता था। जिसकी वजह से बीमार हो गया। बाद में विभाग गया तो बताया गया कि मेरी पीएचडी कैंसिल कर दी गई है। इसके बाद मेरे पास आत्महत्या के अलावा कोई रास्ता नहीं बचा था।
पीएचडी निदेशक प्रो. उमाशंकर ने कहा कि शोध छात्र के सारे आरोप निराधार हैं। वह दो महीने तक गायब था। उसे मेल भेजकर सूचित किया गया, लेकिन कोई जवाब नहीं दिया। नियमानुसार दो महीने अनुपस्थित होने के कारण उसका पंजीकरण निरस्त हो गया। विभागाध्यक्ष प्रो. जीपी सिंह ने कहा कि मैंने मई में कार्यभार ग्रहण किया है। शोध छात्र ने मुझे इस तरह की कोई शिकायत नहीं दी।