माइक्रोबायोलॉजी लैब में प्रो. गोपाल नाथ की अगुवाई में इस दवा के प्रभाव की जांच लगातार की जा रही है। इसमें दो तरह के जीवाणुओं को लिया गया है। ग्राम पॉजिटिव और ग्राम निगेटिव। दोनों पर अलग-अलग असर देखने को मिले हैं। दवा का असर ग्राम निगेटिव जीवाणु पर ज्यादा देखने को मिला है। ग्राम निगेटिव जीवाणु एंटीबॉडी के प्रति अधिक प्रतिरोधी होते हैं। यह दवा जीवाणुओं को मारने और उसका प्रभाव कम करने में ज्यादा कारगर है।
प्रो.आनंद चौधरी के अनुसार डब्ल्यूएचओ की रिपोर्ट के अनुसार, लगभग 80 फीसदी लोग कई बीमारियों के इलाज के लिए तुलसी सहित अन्य पौधों का उपयोग करते हैं। पौधों में मौजूद फाइटोकेमिकल्स को सिंथेटिक दवाओं के विकल्प के रूप में उपयोग किए जाने की क्षमता है। जैसे नीम को ग्राम फार्मेसी या प्रकृति की दवा की दुकान के रूप में जाना जाता है। तुलसी को प्रकृति की मां औषधि कहा जाता है।