बीएचयू कैंपस में पखवारे भर के भीतर रैगिंग की यह दूसरी और महीने की तीसरी वारदात है जिसने परिसर को सुलगा कर रख दिया। विश्वविद्यालय में रैगिंग हो रही है लेकिन कम मामले ही उजागर होते हैं। जो मामले सामने भी आए तो उसे विवि प्रशासन ने गंभीरता से नहीं लिया।
अगर विश्वविद्यालय प्रशासन सजग होता तो ऐसे उपद्रवों को रोका जा सकता था। परिसर में रैगिंग की घटनाएं बढ़ने से एंटी रैगिंग सेल की भूमिका पर भी सवाल खड़े हो गए हैं। साथी ही परिसर की सुरक्षा पर भी सवाल उठने लगे हैं।
शुक्रवार को जिस तरह से दोपहर में घटना होने लगी थी, उसके बाद यदि सुरक्षा से जुड़े लोग मामले को गंभीरता से लेते तो शायद शाम को इतनी बड़ी वारदात नहीं होती। आरोप है कि तृतीय वर्ष के छात्र प्रथम वर्ष के छात्र को हॉस्टल में उठाकर लाए और पिटाई कर दी लेकिन इस दौरान सुरक्षा व्यवस्था में लगे कर्मचारियों ने उन्हें रोकने तक की जहमत नहीं उठाई।
जब छात्र गुट आमने-सामने आ गए तब पूरी मुस्तैदी दिखी। वहां भी प्राक्टोरियल बोर्ड के कुछ ही सदस्य मौके पर दिखे। अभी अगस्त के अंतिम सप्ताह में दृश्य कला संकाय में भी चलती क्लास से एक छात्र को उठाकर हॉस्टल ले जाकर पिटाई की घटना हो चुकी है। उस समय भी किसी ने रोका तक नहीं था। संकाय के छात्रों ने इसकी लिखित शिकायत की थी।
रैगिंग की घटनाएं रोकने के लिए यूजीसी की ओर से समय-समय पर दिशा निर्देश जारी करने के बावजूद एंटी रैगिंग सेल बेमतलब साबित हो रहा है। शिकायत के लिए एक हेल्प लाइन नंबर भी यूजीसी की ओर से जारी किया गया है।
इन सबके बाद भी इस तरह की घटना कम नहीं हो रही है। बीएचयू कैंपस में पखवारे भर के भीतर रैगिंग की यह दूसरी घटना है, जिसकी लिखित शिकायत पीड़ित छात्र या छात्रा की ओर से प्राक्टोरियल बोर्ड को की गई है।
चीफ प्रॉक्टर प्रो. ओएन सिंह ने बताया कि 15 दिन पहले सोशल साइंस की एक छात्रा के साथ रैगिंग हुई थी। मामले में जांच के बाद कुलपति के निर्देश पर ऐसा करने वाले छात्र को गुरुवार को निलंबित कर दिया गया।
इसके पहले हुई रैगिंग की एक अन्य घटना की जांच चल रही है। शुक्रवार को छात्रा के साथ हुए रैगिंग के मामले को एंटी रैगिंग सेल को भेज दिया गया है।