बीएचयू बवाल मामले की मजिस्ट्रीयल जांच में गुरुवार को तीसरे दिन भी किसी ने बयान दर्ज नहीं कराया। जबकि, गुरुवार को अवकाश होने के बावजूद बयान दर्ज करने के लिए जांच अधिकारी एडीएम प्रशासन मुनींद्रनाथ उपाध्याय की अदालत खुली हुई थी।
पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों में भी एडीएम सिटी वीरेंद्र पांडेय को छोड़कर किसी ने अपनी रिपोर्ट अब तक नहीं सौंपी है। एडीएम सिटी ने अपनी रिपोर्ट जांच अधिकारी को सौंपी लेकिन उस बारे में किसी तरह की जानकारी देने से इनकार किया।
मजिस्ट्रीयल जांच के तहत जांच अधिकारी मुनींद्रनाथ उपाध्याय ने घटनाक्रम से जुड़े सभी पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों से रिपोर्ट मांगी थी। बयान दर्ज कराने और रिपोर्ट देने के लिए पांच अक्तूबर तक का समय है।
बीएचयू में छात्र, छात्राओं और पत्रकारों पर हुए लाठीचार्ज के मामले में डीएम योगेश्वर राम मिश्रा के निर्देश पर यह जांच कराई जा रही है। बीएचयू बवाल मामले में कमिश्नर नितिन रमेश गोकर्ण ने जो रिपोर्ट शासन को भेजी है, उसे अब केंद्र सरकार को भेजे जाने की तैयारी है।
प्रशासनिक सूत्रों की मानें तो इसमें बताया गया है कि सबसे पहली चूक विश्वविद्यालय प्रशासन की है। अगर धरनारत छात्राओं से पहले ही दिन वार्ता कर ली गई होती तो बवाल न हुआ होता।
इसमें पुलिस की भी लापरवाही का उल्लेख है। पीएमओ और मानव संसाधन विकास मंत्रालय विश्वविद्यालय प्रशासन के खिलाफ जांच में इस रिपोर्ट को शामिल करेगा।