शोध कार्यों में नकल, आंकड़ों में हेरफेर की अनियमितता को रोकने की जरूरत
आईएमएस बीएचयू के चिकित्सा विज्ञान संस्थान में कार्यशाला में शोध कार्यों में हेराफेरी, नकल आदि बिंदुओं पर विस्तार से चर्चा की गई। बतौर मुख्य अतिथि कुलपति प्रो. अजित कुमार चतुर्वेदी ने शोधपत्रों की संख्या और उद्धरणों की गणना से अधिक नैतिक मानकों को प्राथमिकता देने का आह्वान किया। कहा कि नकल और आंकड़ों में हेरफेर जैसी अनियमितताओं को रोकने की जरूरत है।
आईएमएस में डीन रिसर्च प्रो. मनोज पांडेय की देखरेख में केएन उडुप्पा सभागार में कुलपति ने शोधार्थियों की आने वाली पीढ़ियों में सत्यनिष्ठा की स्थायी संस्कृति विकसित करने के लिए शोध नैतिकता का प्रारंभिक स्तर पर ही प्रशिक्षण देने की आवश्यकता बताई। आईएमएस के निदेशक प्रो. एसएन संखवार ने कहा कि आकलन केवल शोधपत्रों की संख्या या उद्धरणों से नहीं बल्कि शोध के प्रति समाज के विश्वास और सकारात्मक बदलावों से किया जाना चाहिए। डॉ. के नरसिम्हा मूर्ति ने कहा कि प्राचीन काल से ही ज्ञान के विकास के साथ नैतिक सिद्धांत जुड़े रहे हैं।