बीएचयू में पीएचडी मामलों को लेकर चल रहे बवाल और धरने के छह दिन की रिपोर्ट भारत सरकार को भेज दी गई है। बीएचयू के तीन मुख्य स्थलों को धरना स्पॉट बना दिया गया, इसके पीछे प्रशासनिक विफलता वजह रही। खुफिया विभाग की जांच में इंटरनल फैक्ट फाइडिंग एसेसमेंट के तहत बीएचयू के छह शीर्ष अधिकारियों को जिम्मेदार ठहराया गया है।
आरोप है कि धरना रोकने से लेकर चयन और एकेडमिक प्रक्रियाओं में कई खामियां की हैं, जिसके चलते ऐसी स्थिति बनी। समय से धरना रोका या खत्म नहीं किया गया। जबकि ऐसा किया जा सकता था। टीम ने सरकार से इस स्थिति से जल्द से जल्द निपटने का सुझाव भी दिया है। इस रिपोर्ट की एक कॉपी पीएमओ और दूसरी कॉपी शिक्षा मंत्रालय को भेजी गई है।
इसे भी पढ़ें; UP: 25 साल पुरानी मशीन का रिकॉर्ड, गाजीपुर से फ्रांस, श्रीलंका और स्विट्जरलैंड तक हो रहा अफीम का निर्यात
रिपोर्ट में बताया गया है कि अर्चिता का प्रवेश गलत नहीं है। वह योग्य है। इससे पहले काशी शिवम सोनकर को पीएचडी में प्रवेश नहीं दिए जाने के मामले ने तूल पकड़ा था। सामान्य श्रेणी में द्वितीय स्थान प्राप्त करने वाले शिवम विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा प्रवेश नहीं दिया गया। इसके बाद सोनकर कुलपति आवास के बाहर धरने पर बैठ गए थे।
इसे भी पढ़ें; Jaunpur News: बेल्ट और कुर्सी से की युवक की पिटाई, वीडियो वायरल हुआ तो नप गए थानाध्यक्ष; एसपी ने लिया ये एक्शन
काफी समय तक धरने के बाद और संसद में मामला उठने के बाद बीएचयू प्रशासन ने उनका प्रवेश लिया था। शिवम के समर्थन में कांग्रेस, सपा सहित कई पार्टियां आईं थी। नेताओं ने मौके पर पहुंचकर शिवम को समर्थन दिया था। इसके अलावा भी पीएचडी में प्रवेश को लेकर बीएचयू प्रशासन फैसला विवाद में रहा है।