बीएचयू कैंपस तीन महीने बाद बुधवार को एकबार फिर सुलग उठा। इसके पीछे एक बहुत बड़ी साजिश रची गई थी। इस बवाल के जरिये सितंबर महीने की तरह ही लंबे समय के लिए बीएचयू परिसर का माहौल एक बार अशांत करने की तैयारी थी।
सर्विलांस की मदद से पुलिस की छानबीन में यह बात सामने आई है। उच्चाधिकारियों के अनुसार, एससी-एसटी वर्ग के छात्र की पिटाई कर आरोप प्राक्टोरियल बोर्ड के सुरक्षाकर्मियों पर मढ़ने की थी।
इसी बहाने परिसर में छात्र हित की आड़ में फिर से धरना-प्रदर्शन शुरू करने की तैयारी थी। यह योजना आशुतोष के ही निर्देशन में बनाई गई थी लेकिन राज खुलने के चलते उपद्रवी अपने मंसूबे में कामयाब नहीं हो पाए।
एसपी सिटी दिनेश कुमार सिंह ने बताया कि लंका थानाध्यक्ष को सिंह द्वार से नरिया गेट तक और विश्वनाथ मंदिर के आसपास लगे सीसीटीवी कैमरे का फुटेज जुटाने के निर्देश दिए गए हैं। फुटेज के आधार पर उपद्रवी छात्रों को चिह्नित किया जाएगा। रात एक बजे तक नौ छात्रों को चिह्नित कर उनकी गिरफ्तारी के लिए दो टीमें बनाई गई हैं। एहतियातन परिसर के मुख्य द्वार और नरिया गेट पर फोर्स तैनात है।
इन 15 छात्रों पर दर्ज कराया गया मुकदमा
बीएचयू में हुए बवाल को लेकर चीफ प्राक्टर प्रो.रोयाना सिंह ने एमसीए के गौरव सिंह, एमए के आशुतोष त्रिपाठी, शिवम द्विवेदी, प्रवीण राय योगी, बीए के शुभम तेवतिया, बिट्टू सिंह, गौरव कुमार, अभिजीत मिश्रा, रुद्र प्रताप सिंह, लक्ष्मी नारायण शर्मा, सत्यम राय, धीरज सिंह और हिमांशु प्रभाकर, पूर्व छात्र सौरभ राय, प्रतीक तिवारी के खिलाफ लंका थाने में नामजद तहरीर दी है।
इस बारे में लंका थानाध्यक्ष ने बताया कि सभी नामजद आरोपियों के खिलाफ मारपीट, तोड़फोड़, बलवा, आगजनी सहित अन्य आरोपों से संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर गिरफ्तारी के लिए पुलिस टीमें गठित कर दी गई हैं।
... और बाहर का माहौल रहा सामान्य
हाल के दिनों में बीएचयू परिसर का माहौल जब भी अराजक हुआ सिंह द्वार के आसपास की दुकानों पर सन्नाटा पसर जाया करता था। मगर, बुधवार को ऐसा नहीं हुआ। बीएचयू गेट को फोर्स ने चारों तरफ से घेर लिया था और बाहर चाय-पान की दुकानों पर लोग आम दिनों की तरह खड़े थे। दवा और अन्य दुकानें भी सामान्य तरीके से खुली रहीं।