बीएचयू परिसर में पिछले साल सितंबर में छेड़खानी के विरोध में धरने के दौरान चीफ प्रॉक्टर द्वारा पिज्जा, कोल्ड ड्रिंक का बयान देने का पहले छात्रों ने विरोध किया अब कार्रवाई का दंश झेल रहे हैं।
मामले में तीन मई को चीफ प्रॉक्टर ने 13 नामजद छात्रों पर मारपीट, हत्या का प्रयास सहित गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज कराया था, अब इसकी जांच भी शुरू हो गई। उधर छात्र-छात्राओं ने विश्वविद्यालय की ओर से गठित स्टैडिंग कमेटी की जांच पर सवाल खड़ा किया है।
विश्वविद्यालय परिसर का माहौल पिछले 20 दिन से गरमाया है। मारपीट, तोड़फोड़, चाकूबाजी तो कभी आगजनी, पत्थरबाजी की घटनाएं होने के बाद भी कोई ठोस कार्रवाई विश्वविद्यालय प्रशासन नहीं कर रहा है। नया विवाद चीफ प्रॉक्टर के बयान के बाद शुरू हुआ है।
इसका तीन मई को विरोध करने गए छात्रों पर चीफ प्राक्टर की तहरीर पर इनके विरुद्ध हत्या के प्रयास, तोड़फोड़, मारपीट, बलवा सहित अन्य गंभीर धाराओं में लंका थाने में मुकदमा भी दर्ज हो चुका है।
इधर मामले पर पांच मई को कृषि विज्ञान संस्थान के निदेशक प्रो. ए वैशंपायन की अध्यक्षता वाली स्टैडिंग कमेटी ने आठ छात्रों को सात मई को बयान के लिए बुलाया। छात्र पहुंचे और बारी बारी से कमेटी के सामने अपना बयान दर्ज कराया।
छात्रों ने सोशल मीडिया पर जारी अपने एक बयान में चीफ प्रॉक्टर के कमेटी होने पर न केवल आपत्ति जताया है बल्कि कमेटी पर ही सवाल खड़ा किया है। बैठक के दौरान चीफ प्रॉक्टर पर डराने-धमकाने का भी आरोप छात्रों की ओर से लगाया गया है।
चीफ प्रॉक्टर प्रो. रोयाना सिंह ने कहा कि छात्रों द्वारा लगाए गए सभी आरोप पूरी तरह से गलत है। कमेटी के सदस्य की वजह से बैठक में शामिल हुई थी। यह फैक्ट फाइडिंग कमेटी होती है। कभी भी किसी छात्र का अहित करना किसी का मकसद नहीं होता है। कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर विश्वविद्यालय प्रशासन आगे कार्रवाई करेगा।