पता चला कि वह शव बीएचयू के लापता छात्र का था। मामले की सुनवाई करते हुए मुख्य न्यायाधीश राजेश बिंदल तथा न्यायमूर्ति पीयूष अग्रवाल की खंडपीठ ने विवेचना अधिकारी को डीएनए रिपोर्ट हलफनामे के साथ दाखिल करने का निर्देश दिया है और याची को भी सरकारी हलफनामे का जवाब दाखिल करने का समय दिया है। याचिका की सुनवाई जुलाई 22 में होगी।
पुलिस अभिरक्षा में मौत के आरोप बुनियाद
राज्य सरकार की तरफ से अपर शासकीय अधिवक्ता मोहम्मद मुर्तजा ने बताया कि पुलिस अभिरक्षा में मौत के आरोप बुनियाद हैं। वह मारपीट के कारण नहीं स्वयं मर गया था। हालांकि पुलिस पर कार्रवाई भी की गई थी। याची ने सरकार की जानकारी को सही न मानते हुए आपत्ति की।
घटना 13-14 फरवरी 2020 की रात हुई थी जब लंका थाने की पुलिस छात्र को पकड़कर ले गई थी। उसके बाद से वह लापता था। सरकार की तरफ से कहा गया कि छात्र मानसिक कमजोर था। वह लंका थाने से चला गया था। जब कोर्ट ने थाने की फुटेज की बात की तो बताया कि सीसीटीवी कैमरा खराब था। बीएससी तृतीय वर्ष के छात्र शिवकुमार त्रिवेदी को थाने में पीटकर गायब करने की आशंका पर याचिका दायर की गई है। कोर्ट ने अधिकारियों को तलब कर फटकारा और जांच सीबीसीआइडी को सौंप दी थी।