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BHU Placement: आईक्यू और ईक्यू में बेहतर तालमेल रखने से छात्रों में प्लेसमेंट से पहले बढ़ेगी दक्षता, जानें खास

Sun, 08 Feb 2026 02:42 PM IST
प्रगति चंद अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।

सार

21वीं सदी की स्किल में दक्ष बनाने के लिए बीएचयू के प्लेसमेंट सेल में पैनल संवाद हुआ। इससे आईक्यू और ईक्यू में बेहतर तालमेल रखने से छात्रों में प्लेसमेंट से पहले दक्षता बढ़ेगी।
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : Adobe Stock
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विस्तार
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बीएचयू में प्लेसमेंट से पहले छात्रों में 21वीं सदी की स्किल में दक्षता बढ़ाने के लिए पैनल संवाद आयोजित किया गया। प्लेसमेंट एवं इंटर्नशिप सेल की ओर से शनिवार को ईक्यू (इमोशनल कोटेंट-बुद्धि लब्धि) और आईक्यू (इंटेलिजेंस कोटेंट-भावनात्मक गुण) के बीच बेहतर तालमेल बनाए रखने की आवश्यकता पर जोर दिया गया। इससे करियर को बेहतर ढंग से मैनेज किया जा सकता है।

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सेल के भवन में स्थित हॉल में 100 से अधिक छात्राओं और छात्रों की मौजूदगी रही। सेल के समन्वयक प्रो. अमित गौतम और ट्रेनिंग एंड प्लेसमेंट अधिकारी डॉ. उमेश सिंह ने सभी एक्सपर्ट्स का स्वागत किया और कार्यक्रम के बारे में जानकारी दी। प्रो. अमित गौतम ने सेल की गतिविधियों, इसकी भूमिका और बीएचयू की शैक्षणिक उत्कृष्टता पर प्रकाश डाला। उन्होंने राष्ट्र निर्माण में विश्वविद्यालय की ऐतिहासिक भूमिका और छात्रों को गांधी फेलोशिप कार्यक्रम से जुड़ने की सलाह दी। कार्यक्रम का संचालन पिरामल फाउंडेशन द्वारा किया गया।

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विकसित भारत 2047 की तैयारी

छात्र अधिष्ठाता प्रो. रंजन कुमार सिंह ने कहा कि विकसित भारत 2047 के लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए युवाओं का सर्वांगीण विकास आवश्यक है। छात्रों को केवल अकादमिक रूप से ही नहीं, बल्कि नैतिक, सामाजिक और नेतृत्व के स्तर पर भी सशक्त बनाना विश्वविद्यालय की प्राथमिकता है। गांधी फेलोशिप के प्रमुख संस्थापक निदेशक विवेक शर्मा ने कहा कि किसी भी कौशल के विकास के लिए उपयुक्त परिवेश होना जरूरी है। छात्रों को पेशेवर बनने के लिए सीखने और ध्यानपूर्वक सुनने की क्षमता विकसित करनी होगी। उन्होंने बताया कि सफलता का अर्थ केवल आगे बढ़ना नहीं, बल्कि फलना-फूलना है। आधुनिक समय के अनुरूप अपनी योग्यताओं, क्षमताओं और दृष्टिकोण का निरंतर विकास करना आवश्यक है।
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सामाजिक जिम्मेदारी से विकसित होगी नेतृत्व क्षमता

गांधी फेलोशिप कार्यक्रम के वरिष्ठ प्रबंधक अवधेश मिश्र ने कहा कि नेतृत्व का वास्तविक मूल्य तभी स्थापित होता है जब व्यक्ति समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी समझे। हर व्यक्ति को स्वयं से यह प्रश्न करना चाहिए कि उसने समाज को क्या योगदान दिया है। कार्यक्रम के अंत में छात्रों ने नेतृत्व, कॅरिअर विकास और सामाजिक प्रभाव से जुड़े सवाल पूछे। बीएचयू के ट्रेनिंग एंड प्लेसमेंट अधिकारी डॉ. उमेश सिंह ने कहा कि छात्रों को न केवल रोजगार के लिए, बल्कि जिम्मेदार और मूल्य-आधारित नागरिक बनने के लिए भी प्रेरित किया जाता है।
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