अगरिया जनजाति पर काम करने के लिए 30 लाख
डॉ. प्रभाकर उपाध्याय अगरिया जनजाति की पारिवारिक व्यवस्था और उनकी संसाधान खोज की तकनीक पर काम करेंगे। सोनभद्र के इलाकों में मिले प्राचीन भारतीय लौह धातुकर्म का सामाजिक और तकनीकी विश्लेषण करेंगे। इसके लिए इन्हें 30 लाख रुपये दिए जाएंगे। रिसर्च की थीम टेक्नोलॉजी एंड फैमिली लाइफ थीम पर दि अगारिया कुटुम्ब व्यवस्था ऐज अ लिविंग आर्काइव: अ टेक्निकल एनालिसिस आफ इट्स रोल इन प्रिजरविंग एनशिएन्ट इंडियन आयरन मेटलर्जी है।
ऑक्सफोर्ड की रदरफोर्ड लैब में कर चुके हैं रिसर्च
डाॅ. उपाध्याय ने पुरातत्ववेत्ता प्रो. विभा त्रिपाठी के साथ डिपार्टमेंट ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी और इंडियन नेशनल साइंस एकेडमी की कई बड़ी परियोजनाओं पर काम किया है। काशी महाजनपद के पांच महत्वपूर्ण पुरास्थलों से प्राप्त प्राचीन लौह सामग्रियों के अध्ययन के लिए न्यूटन इंडिया ग्रांट के तहत ऑक्सफोर्ड की रदरफोर्ड एपलिटन लैब में भी काम किया है। आईआईटी बीएचय में आई एक परियोजना में सिंहभूमि की प्राचीन ताम्र खदानों का भी अध्ययन किया है।