ओवरसाइट कमेटी की अध्यक्षता कला संकाय के डीन प्रो. एमआर मेहता ने की। कमेटी ने पाया कि बिना सत्रीय परीक्षा के नंबर देना विश्वविद्यालय के अध्यादेशों का उल्लंघन है। कमेटी ने जिम्मेदार शिक्षकों को हटाकर दो एक्सटर्नल शिक्षकों को पेपर सेटिंग की जिम्मेदारी देने का सुझाव दिया। कमेटी के बाकी सदस्यों में प्रोफेसर एमएस पांडेय , प्रोफेसर सुषमा घिल्डियाल और आमंत्रित सदस्यों में प्रोफेसर अनुराग दवे और डॉ. ज्ञान प्रकाश मिश्र थे।
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कमेटी की रिपोर्ट के अनुसार, एमसी-105 (कंप्यूटर एप्लीकेशन प्रैक्टिकल) और एमसी-104 के पेपर में अंक जमा करने में देरी की गई। पीजीडीजे-03 (हिंदी पत्रकारिता) के अंक प्रस्तुत नहीं किए गए। इन शिक्षकों को कई नोटिस मिली लेकिन जवाब नहीं आया। एमसी-303 (ऑनलाइन जर्नलिज्म) और एमसी-302 जैसे व्यावहारिक पेपरों की परीक्षाएं दोबारा आयोजित करने की सलाह दी गई, क्योंकि इनमें भी सत्रीय अंक जमा नहीं हुए थे। वहीं कमेटी ने यह भी माना कि कई पेपरों के सवाल और सत्रीय अंक गलत तरीके से विभागाध्यक्ष द्वारा अपलोड किए गए, जो प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल उठाता है।
क्या बोले विभागाध्यक्ष
न तो पेपर, न आंसर शीट सेट हुआ और न ही परीक्षा हुई। उनकी जगह विभागाध्यक्ष को ये काम करना पड़ा। आज तीन में से विभाग में सिर्फ दो ही प्रोफेसर हैं और उनके से सिर्फ एक ही कक्षाएं ले रहे। हालांकि कमेटी को अपनी रिपोर्ट कुलपति को सबमिट किया है।
प्रो. शोभना नार्लीकर, विभागाध्यक्ष, बीएचयू