यहां पिछले चार साल में बिहार के 1136 मरीजों का आयुष्मान योजना के तहत निशुल्क इलाज (भर्ती होने के बाद जांच, ऑपरेशन आदि) किया गया। इसमें करीब 8 करोड़ रुपये का भुगतान ट्रॉमा सेंटर को नहीं हो सका है। धनराशि बढ़ता देख अब सर्जरी के लिए उपकरण, दवा आदि सामानों को देने वाली कंपनियों ने बिना धनराशि दिए सामान देने से मना कर दिया है।
लिहाजा ट्रॉमा सेंटर प्रशासन ने बिहार के मरीजों का आयुष्मान मद से निशुल्क इलाज बंद कर दिया है। मामले की जानकारी होने के बाद बक्सर के सांसद सुधाकर सिंह ने मुख्यमंत्री को 6 फरवरी को जो पत्र लिखा है, उसमें बताया कि आयुष्मान भारत योजना का उद्देश्य गरीबो को जीवनरक्षक इलाज उपलब्ध कराना है। उसी योजना में बिहार के लाभार्थियों को इलाज से वंचित होना पड़ रहा है।
बक्सर से आते हैं अधिकांश मरीज, भुगतान में देरी ठीक नहीं
अमर उजाला से बातचीत में सांसद ने यह भी बताया कि ट्रॉमा सेंटर में अधिकांश मरीज उनके संसदीय क्षेत्र यानी बक्सर से इलाज कराने ट्रॉमा सेंटर जाते हैं। इसमें दुघर्टना पीड़ित के साथ ही कई गंभीर मरीज रहते हैं। ऐसे में भुगतान में देरी की वजह से बिहार के मरीजों का इलाज रूकने से मरीजों के जीवन के साथ खिलवाड़ है।
सांसद ने मुख्यमंत्री से तत्काल बीएचयू ट्रॉमा सेंटर में आयुष्मान योजना के बकाए का भुगतान करने, इसमें लापरवाही करने वाले जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। साथ ही भविष्य में इस तरह की स्थिति न उत्पन्न हो, इसलिए समय पर भुगतान सुनिश्चित कराया जाना चाहिए।
सांसद ने मुख्यमंत्री से पूछा यह सवाल
- आयुष्मान योजना के तहत भुगतान समय पर क्यों नहीं किया गया।
- क्या सरकार को इस बकाया राशि की जानकारी नहीं थी या जानबूझकर इसको नजरअंदाज किया गया।
- क्या बिहार के मरीज सरकार की प्राथमिकता में नहीं है।
- यदि समय पर भुगतान हो गया होता तो आज यह स्थिति उत्पन्न नहीं होती।