अब सप्ताह में दो दिन गुरुवार और शुक्रवार को परिसर के हॉस्टलों में एक टीम जाकर छात्र-छात्राओं से बातचीत कर उनकी समस्याएं जानेगी। चीफ प्रॉक्टर प्रो. रोयाना सिंह ने बताया कि इसी सप्ताह से यह पहल होगी।
पहले चरण में छात्राओं के हॉस्टल से इसकी शुरूआत की जाएगी, इसके बाद छात्रों के हॉस्टल में भी टीम जाएगी। छात्र-छात्राओं की समस्याओं का समाधान कराया जाएगा। साथ ही उनसे भी सुझाव मांगे जाएंगे।
चीफ प्राक्टर ने बताया कि मेडिकल की छात्राओं के हॉस्टल की तरह अब अन्य हॉस्टलों में भी छात्राओं को जूडो-कराटे की ट्रेनिंग दी जाएगी। हर दिन शाम 4.30 से 5.30 बजे तक चलने वाली ट्रेनिंग में आत्मरक्षा के गुर सिखाए जाएंगे।
उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय परिसर में छात्राओं की सुरक्षा के लिए 13 महिला सुरक्षाकर्मियों की तैनाती कर दी गई है। चीफ प्राक्टर प्रो. रोयाना सिंह ने बताया कि इनमें कुछ सेना के शहीद जवानों की पत्नियां भी हैं, जिन्हें सैनिक कल्याण निगम की ओर से यहां भेजा गया है।