सोमवार से वाराणसी समेत आसपास के जिलों से आने वाले मरीजों ने रुपए की जगह 30 का पर्चा कटाया। ओपीडी में डॉक्टर को दिखाने देवरिया से आई उर्मिला देवी और भदोही से रामविलास पांडेय ने पंजीकरण फीस बढ़ने पर कहा कि विश्वविद्यालय प्रशासन को पहले सुविधाओं पर ध्यान देना चाहिए,उसके बाद ही पंजीकरण की फीस बढ़ाने पर फैसला लेना चाहिए था।
अब भी अस्पताल में न तो स्ट्रेचर समय पर मिल पाता है और न ही खराब लिफ्ट बन सका है। इसके अलावा आईसीयू में बेड की कमी भी बनी रहती है। ऐसे में इस तरह पंजीकरण की फीस बढ़ाना उचित नहीं लगता है।
ओपीडी पंजीकरण फीस में 50 प्रतिशत बढ़ाने का छात्रों ने विरोध किया है। बिरला बी छात्रावास में हुई एक बैठक में छात्रों ने इसे मरीजों के हित में वापस लेने की मांग की है। साथ ही ऐसा न होने पर आंदोलन की चेतावनी भी दी है। उनका कहना है कि इसका असर सीधे गरीबों की जेब पर असर पड़ेगा।
अध्यक्षता करते हुए छात्र मृत्युंजय तिवारी आजाद ने कहा कि महामना मदन मोहन मालवीय जी ने विश्वविद्यालय की स्थापना सर्व समाज के कल्याण के लिए किया था जबकि विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से फीस बढ़ाया जा रहा है, जो ठीक नहीं है। बैठक में वैभव तिवारी, अभिषेक कुमार सिंह ,अवनींद्र राय, दिलीप कुमार मौर्य, आलोक कुमार सिंह, कुमार क्षितिज ,राघवेंद्र राय आदि मौजूद रहे।