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Varanasi: बीएचयू में ह्रदय रोगियों के लिए सिर्फ 49 बेड, प्रो. ओमशंकर ने मांगे 90; लगाया ये आरोप

Fri, 27 Sep 2024 01:20 PM IST
प्रगति चंद अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।

सार

बीएचयू अस्पताल में शुक्रवार की सुबह आयोजित डॉक्टर ओमशंकर की प्रेस कॉन्फ्रेंस को रुकवाने के लिए गार्ड, बाउंसर और सुरक्षाधिकारी पहुंच गए। इस दौरान डॉक्टर ने इसका विरोध किया। कहा कि ये अधिकार किसने दिया। 
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डॉक्टर ओमशंकर की प्रेस कॉन्फेंस रुकवाने पहुंचे गार्ड व बाउंसर - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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बीएचयू के ह्रदय रोग विशेषज्ञ प्रो. ओमशंकर ने शुक्रवार को प्रेस-कॉन्फ्रेंस कर अस्पताल प्रशासन पर मरीजों के साथ खिलवाड़ का आरोप लगाया। अतिरिक्त बेड की मांग कर कहा कि ह्रदय रोग विभाग में मरीजों की भर्ती के लिए सिर्फ 49 बेड मिले हैं। लेकिन, विभागाध्यक्ष ने अस्पताल प्रशासन से इतने ही बेड के लिए समझौता कर लिया है। जबकि, उनके पास ऐसा करने का कोई कानूनी अधिकार नहीं है। मरीजों की सेहत के साथ समझौता नहीं किया जा सकता है।

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उन्होंने मांग रखी कि हृदय विभाग को नए भवन (सुपर स्पेशियलिटी ब्लॉक) में शिफ्ट किया जाए और 90 बिस्तर विभाग को चौथी मंजिल पर आवंटित करें। पांचवीं मंजिल पर कैथ लैब कॉम्प्लेक्स और एकेडमिक ब्लॉक भी हृदय विभाग के रहे।

प्रो. ओमशंकर ने कहा कि पहले भी मांगों को अस्पताल प्रशासन ने नहीं माना है। कहा कि बीएचयू में तीन साल से एग्जीक्यूटिव काउंसिल नहीं है। नियुक्तियों से लेकर प्रमोशन तक के सारे फैसले कुलपति ले रहे हैं। आखिरकार, ईसी का गठन क्यों नहीं किया गया। कैंपस में लोकतंत्र कहां हैं।
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अनशन के बाद 90 बेड देने की बात उठी

प्रो. ओमशंकर ने कहा कि 21 दिन के अनशन के बाद 90 बेड देने की बात की गई थी। अनशन के बाद झूठी जानकारी फैलाई गई कि विभाग को 61 बेड दिए गए हैं और बाकी 29 जल्द दिए जाएंगे। जबकि सच्चाई यह है कि एसएसबी भवन की चौथी मंजिल पर 24 बेड के मानक वाले कमरे में छह बढ़ाकर 30 बेड का बताया गया। कैथ लैब में 14 अस्थायी बेड को भर्ती बेड के रूप में गिना गया। इस तरह से हृदय विभाग को वास्तविक रूप में 61 बेड भी नहीं मिले।

प्रेस वार्ता रुकवाने पहुंचे सुरक्षागार्ड और बाउंसर
प्रो. ओमशंकर की प्रेस वार्ता के बीच प्रॉक्टोरियल बोर्ड के सुरक्षाधिकारी, सिक्योरिटी गार्ड और बाउंसर पहुंचे। उन्होंने इसे रोकने का आग्रह किया। प्रोफेसर ने पूछा कि किसने भेजा तो प्रॉक्टोरियल बोर्ड ने कहा कि आपको पता है कि हम किस से संचालित होते हैं। फिर प्रोफेसर ने मीडिया से बात न करने वाला नोटिस मांगा तो बोर्ड के पास जवाब नहीं था। इसके बाद सभी लौट गए। प्रो. ओमशंकर ने आरोप लगाया कि पत्रकार वार्ता रुकवाने के लिए लंका थाने में भी फोन किया गया था, हालांकि पुलिस ने इसे ठुकरा दिया। 
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