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बीएचयू में व्यवस्था बीमार: इमरजेंसी में स्ट्रेचर पर हो रहा इलाज, टिनशेड में धूल फांक रहे ट्रॉली बेड

Tue, 13 Aug 2024 10:53 AM IST
प्रगति चंद रबीश श्रीवास्तव, वाराणसी।

सार

बीएचयू अस्पताल की इमरजेंसी में स्ट्रेचर पर मरीजों का इलाज किया जा रहा है। हैरान करने वाली बात तो ये है कि ट्रॉली बेड टिनशेड में धूल फांक रहे हैं। बेड के अभाव में गंभीर रूप से बीमार लोगों को भी स्ट्रेचर पर ऑक्सीजन भी दिया जा रहा है। 
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बीएचयू अस्पताल का हाल - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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बीएचयू अस्पताल की इमरजेंसी में जिस मरीज को बेड मिल जाता है, उनका इलाज तो बेड पर होता है, लेकिन यहां बहुत से मरीज आपको स्ट्रेचर पर इलाज कराते नजर आएंगे। अमर उजाला की पड़ताल में सोमवार को कुछ ऐसा ही दृश्य नजर आया। यहां गेट से लेकर इमरजेंसी के अंदर तक जहां-तहां मरीज स्ट्रेचर पर पड़े नजर आए।

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एक ओर जहां स्ट्रेचर पर इलाज कराना पड़ रहा है, वहीं दूसरी ओर इमरजेंसी के पास बने टिनशेड के नीचे करीब 30 ट्रॉली बेड (रिक्लाइनिंग पेसेंट बेड) धूल फांक रहे हैं। स्ट्रेचर की जगह इमरजेंसी में पंजीकरण काउंटर के सामने अगर खाली जगह पर इसी ट्रॉली बेड को लगाकर इलाज किया जाए तो मरीजों को बड़ी राहत होगी।

इस पर भर्ती मरीज को इलाज के दौरान गिरने का डर भी नहीं रहेगा। साथ ही इसमें एनएस, डीएनएस का बॉटल चढ़ाने के लिए भी अलग से स्टैंड भी नहीं लगाना पड़ेगा। करीब 100 बेड वाली इमरजेंसी की स्थिति यह है कि यहां हर दिन 10 से अधिक मरीज स्ट्रेचर पर इलाज कराने को मजबूर रहते हैं। वो भी ऐसा स्ट्रेचर जिस पर कोई चादर नहीं रहती।
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चैनल गेट तक स्ट्रेचर पर इलाज करा रहे मरीज
सोमवार को इमरजेंसी के गेट के बाहर पांच मरीज एक लाइन में स्ट्रेचर पर पड़े रहे तो अंदर पंजीकरण काउंटर के बाहर खाली जगह पर भी पांच से छह मरीजों को स्ट्रेचर पर रखकर इलाज किया जा रहा था। इसके अलावा तीन से चार मरीज इमरजेंसी वार्ड जाने वाले चैनल गेट के पास स्ट्रेचर पर पड़े रहे। इसमें कुछ मरीजों को ऑक्सीजन सिलिंडर लगाया गया था।

एसएसबी की इमरजेंसी में ट्रॉली बेड पर हो चुका है इलाज

बीएचयू अस्पताल की इमरजेंसी को कायाकल्प की वजह से जब सुपर स्पेशियलिटी ब्लॉक (एसएसबी) के भूतल पर शिफ्ट किया गया था तब इसी ट्रॉली बेड को लाइन से लगवाया गया था। इस पर युवा से आसानी से इलाज हुआ। अब इमरजेंसी जब पुरानी जगह पर फिर से चलने लगी है तो यहां इसका प्रयोग नहीं हो पा रहा है। दूर दराज से आने वाले मरीजों को इमरजेंसी में पंजीकरण काउंटर के सामने वाली जगह पर स्ट्रेचर पर लिटाकर इलाज किया जा रहा है। कुछ नए व्हील चेयर को भी जैसे-तैसे रख दिया गया है।

केस-1
जौनपुर निवासी 46 वर्षीय एक महिला को सांस लेने में तकलीफ थी। परिजनों ने एक निजी अस्पताल से इलाज करवाया। यहां से बीएचयू रेफर किया गया। यहां आने पर डॉक्टरों ने ऑक्सीजन सिलिंडर लगाया। महिला अपने परिजनों के साथ स्ट्रेचर पर चैनल गेट के पास पड़ी थी, उसको ऑक्सीजन दिया जा रहा था। परिजनों के अनुसार डॉक्टर ने जगह मिलने पर अंदर भर्ती करने को कहा है।

केस-2
गोरखपुर निवासी एक महिला को पेट दर्द हो रहा था। वह अपने परिजन के साथ इमरजेंसी आई। यहां महिला का प्राथमिक उपचार करने के बाद उसको एक स्ट्रेचर पर रखा गया। परिजन इमरजेंसी में स्ट्रेचर पर लेकर पड़े रहे। परिजनों के अनुसार महिला को पेट संबंधी समस्या के साथ ही खून की कमी भी थी।
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अधिकारी बोले

इमरजेंसी में आने वाले मरीजों के बेहतर इलाज के लिए स्ट्रेचर की जगह जरूरत के हिसाब से खाली पड़े ट्रॉली बेड लगवाए जाएंगे। - प्रो. एसएन संखवार, निदेशक, आईएमएस, बीएचयू
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