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बीएचयू इमरजेंसी में व्यवस्था बेकार: ठंड में खुले में बैठने को मजबूर मरीज, स्ट्रेचर-व्हीलचेयर का संकट गहराया

Thu, 30 Dec 2021 11:45 AM IST
उत्पल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी

सार

बीएचयू अस्पताल की इमरजेंसी इन दिनों  सुपर स्पेशियलिटी ब्लॉक  के भूतल पर चल रही है। मरीजों की संख्या अधिक होने की वजह से बेड पर भर्ती करने के साथ मरीजों को स्ट्रेचर पर रखकर इलाज करना पड़ रहा है। 
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बीएचयू अस्पताल: इमरजेंसी के बाहर का नजारा - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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बीएचयू अस्पताल की इमरजेंसी में दुश्वारियां कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। अस्पताल प्रशासन की ओर से बेहतर सुविधाओं के दावे और लाख प्रयास के बाद भी दूरदराज से आने वाले मरीजों और परिजनों को राहत नहीं मिल पा रही है। बुधवार दोपहर सुपर स्पेशियलिटी ब्लॉक (एसएसबी)  के बाहर कुछ ऐसा ही नजारा दिखा।

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अस्पताल की इमरजेंसी इन दिनों एसएसबी के भूतल पर चल रही है। मरीजों की संख्या अधिक होने की वजह से बेड पर भर्ती करने के साथ मरीजों को स्ट्रेचर पर रखकर इलाज करना पड़ रहा है। जो लोग अंदर भर्ती हो रहे हैं, उन्हें तो कुछ राहत है, लेकिन सबसे अधिक परेशानी बाहर रुके लोगों को हो रही है।
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हालत यह है कि कड़ाके की ठंड में कुछ मरीजों को बाहर ही रहना पड़ रहा है। इसके पीछे कोरोना जांच रिपोर्ट तो कभी सामान्य जांच की रिपोर्ट का इंतजार मुख्य वजह बताई जा रही है। एसएसबी के बाहर कोई जमीन पर बैठने को मजबूर है तो किसी को भर्ती होने से पहले स्ट्रेचर, व्हील चेयर भी नहीं मिल पा रहा है। व्यवस्था में सुधार नहीं हुआ तो मरीजों की समस्या और बढ़ेगी।
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इमरजेंसी के बाहर स्ट्रेचर के लिए खींचतान

इमरजेंसी के बाहर टूटे स्ट्रेचर को ठीक करता कर्मचारी - फोटो : अमर उजाला
सुपर स्पेशियलिटी ब्लॉक के बाहर मरीजों के परिजन स्ट्रेचर लेने पहुंचे तो कर्मचारी ने इंतजार करने को कहा। लोग भी क्या करते हाथ में आधार कार्ड लेकर स्ट्रेचर का इंतजार करते रहे। यहीं नहीं एक स्ट्रेचर आया भी तो दो-तीन मरीजों के परिजन पहुंचे उसे अपनी ओर खींचने लगे। पहले स्ट्रेचर पर हाथ रखने को लेकर बहस हुई। जिसके बाद कर्मचारी आगे बढ़ा और बीचबचाव कर मामले को शांत कराया। जैसे जैसे स्ट्रेचर आए लोगों को दिया गया। 
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परिजनों के लिए बने रैन बसेरा तो मिले राहत

व्हीलचेयर पर खुले आसमान के नीचे बैठी मरीज - फोटो : अमर उजाला
दूरदराज से आने वाले मरीजों के परिजनों के लिए बीएचयू ट्रामा सेंटर की तरह ही अस्पताल की इमरजेंसी के आसपास रैन बसेरा की कोई वैकल्पिक व्यवस्था हो तो कुछ हद तक राहत होगी। यहां जगह भी है। अस्पताल प्रशासन की ओर से ठंड से बचाव के लिए कहीं टीनशेड और ट्रामा सेंटर की तरह व्यवस्था करा दिया जाए तो बड़ी राहत होगी। 
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