स्थिति यह है कि अस्पताल के वार्ड में तो मरीज भर्ती हो रहे हैं, लेकिन एसएसबी में बने सीसीयू वार्ड में ताला बंद होने की वजह से सर्जरी के बाद मरीजों को 400 मीटर दूर चलकर अस्पताल में भर्ती होने आना पड़ता है। नर्सिंग आफिसर की तैनाती न होने से इस तरह की परेशानी झेलनी पड़ती है। बुधवार को अमर उजाला में खबर छपने के बाद आईएमएस निदेशक ने पूरे मामले की जब छानबीन की तो हकीकत सामने आ गई।
निदेशक ने बताया कि मामले में हृदय रोग विभागाध्यक्ष से पूरे मामले में जवाब तलब किया गया है। अस्पताल के सीसीयू वार्ड सहित सामान्य वार्ड को भी एसएसबी में शिफ्ट कराया जाएगा। इसमें किसी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। इसके लिए एमएस से भी बातचीत हो चुकी है।
ये है पूरा मामला
बीएचयू अस्पताल में बने हृदय रोग विभाग के वार्ड में 48 और एसएसबी में 41 बेड थे। दो जगह की बजाय एक जगह यानी एसएसबी में ही मरीजों की सुविधा को देखते हुए इसको संचालित करने के लिए एक कमेटी गठित हुई। कमेटी ने अपनी संस्तुति में यह कहा था कि दोनों बेड अलग-अलग न होकर एक ही जगह एसएसबी में चलाया जाना चाहिए। इसके लिए एसएसबी का पूरा चौथा तल और आधा पांचवां तल हृदय रोग को आवंटित कर पूरे विभाग को शिफ्ट करने की संस्तुति की थी। इसके बाद आईएमएस निदेशक ने भी संस्तुति के अनुसार कार्यवाही के लिए निर्देशित किया था।