ट्रॉमा सेंटर में अव्यवस्था का आलम यह है कि वहां बंद एक कमरे को कहने के बाद भी नहीं खोला गया। मजिस्ट्रेट और पुलिस की मौजूदगी में जब यह कमरा खुला तो वहां पैकेट में बांधकर रखे गए मानव अंग और गंदगी मिली। न्यायमूर्ति ने बताया कि बीएचयू के पास न तो फंड की कमी है और न ही संसाधनों की लेकिन निगरानी में लापरवाही के कारण हालात खराब हैं।
अस्पताल में चार अलग-अलग तरह के कचरे निकलते हैं, जिनको अलग रखना चाहिए, लेकिन ये सभी मिला रहे हैं। निजी अस्पतालों की दुव्र्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि लापरवाही लोगों को रोग बांट रही है। इसके लिए सीएमएस और सीएमओ दोनों जिम्मेदार हैं।
निजी अस्पतालों द्वारा अपना कचरा तो सही दिया जा रहा है लेकिन रक्त और गंदगी सीवर में डाली जा रही है। यही नहीं, करसड़ा कूड़ा निस्तारण संयत्र की जांच में पाया गया कि यहां कार्यरत कर्मचारियों ने अपनी लापरवाही छिपाने के लिए प्लास्टिक को जमीन में गाड़ दिया था।
जमीन की खुदाई करने पर पता चला कि ऐसा लंबे समय से किया जा रहा था। इसके लिए नगर निगम को चेतावनी देने के साथ ही निगरानी बढ़ाने की हिदायत दी गई है।
- जगह-जगह कचरे से बहुत सारे इंफेक्शन बनारस के लोगों में हो रहे हैं। नगर निगम या तो पैसा खा जाता है, वेस्ट करते हैं या फिर प्लानिंग नहीं है इनके पास। शर्म की बात है कि अधिक खर्च के बाद भी आम लोगों और मरीजों को स्वास्थ्य सुविधाएं, साफ पानी और शुद्घ हवा नहीं मिल पा रही है। सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति देवी प्रसाद सिंह, चेयरमैन, यूपी एनजीटी
- एनजीटी टीम की रिपोर्ट की जानकारी नहीं है। यहां खुले में मांस और मानव अंग फेंकने की बात गलत है। अगर टीम के पास कोई फोटो और वीडियो फुटेज हो तो उसको देखने के बाद ही कुछ कहा जा सकता है। बायोवेस्ट का निस्तारण प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के निर्देश पर आउटसोर्सिंग सिस्टम से कराया जा रहा है। प्रो. संजीव गुप्ता, प्रोफेसर इंचार्ज, बीएचयू ट्रॉमा सेंटर
- टीम ने अगर मेडिकल बायोवेस्ट के साथ अंग काटकर फेंकने की रिपोर्ट दी है तो इसका मूल्यांकन कराकर व्यवस्था सुधारी जाएगी। अस्पताल में बायोमेडिकल वेस्ट
का निस्तारण कराने वाली कंपनी को तीन बार नोटिस दी जा चुकी है। अब नया टेंडर होना है। सुपर स्पेशियलिटी सेंटर बनने से कचरा घर भी टूट गया है। प्रो. विजय नाथ मिश्रा, एमएस, सर सुंदरलाल अस्पताल