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Varanasi: बीएचयू में अमेरिका से आए प्रोफेसर ने कहा... बीड़ी जलइले जिगर से पिया गाना नौटंकी से लिया गया

Sat, 17 Jan 2026 11:17 PM IST
प्रगति चंद अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।

सार

Varanasi News: प्रो. देवेंद्र शर्मा ने ‘नौटंकी, पारसी थिएटर और बॉलीवुड’ की थीम पर व्याख्यान दिया। उन्होंने कहा कि बीड़ी जलइले जिगर से पिया गाना नौटंकी से लिया गया। 
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बीएचयू में प्रोफेसर देवेंद्र शर्मा व अन्य - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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बीएचयू में ‘नौटंकी, पारसी थिएटर और बॉलीवुड’ की थीम पर हुए व्याख्यान में नौटंकी की विकास गाथा सुनाई गई। अंतर-सांस्कृतिक अध्ययन केंद्र और मालवीय मूल्य अनुशीलन केंद्र में कैलिफोर्निया स्टेट यूनिवर्सिटी से आए संप्रेषण और प्रदर्शन विभाग के प्रोफेसर देवेंद्र शर्मा ने कहा कि बॉलीवुड फिल्म ओमकारा का ‘बीड़ी जलइले जिगर से पिया’ लोकप्रिय नौटंकी से लिया गया था।

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उन्होंने कहा, नौटंकी केवल नाटक नहीं, बल्कि एक समग्र कला-रूप है, जिसमें गायन, नृत्य, अभिनय और संगीत का सुंदर समन्वय देखने को मिलता है। ‘नौटंकी’ शब्द स्वयं आकर्षण पैदा करता है और इसकी विषयवस्तु हमेशा जन-जीवन से जुड़ी रही है। प्रो. शर्मा ने कहा कि नौटंकी पांच रातों तक चलने वाला मंचीय कार्यक्रम होता था, जिसमें कथा, रस, संवाद और संगीत समान रूप से महत्वपूर्ण होते थे। अमर सिंह राठौर जैसे लोकनायक नौटंकी के लोकप्रिय पात्र रहे हैं। उन्होंने यह भी बताया कि स्वांग और भगत जैसी लोकनाट्य परंपराओं ने कई क्षेत्रों से तत्व आत्मसात कर नौटंकी को समृद्ध बनाया। नौटंकी मूल तौर पर म्यूजिकल थिएटर रही है, मात्र संगीत नहीं।

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1907 तक नौटंकी मथुरा से निकलकर पहुंची काशी

नौटंकी की शास्त्रीय और लोकप्रिय कथाएं—जैसे लैला-मजनूं, शिरीं-फरहाद, गोपीचंद—जनमानस में अत्यंत लोकप्रिय रही हैं। प्रो. शर्मा ने बताया कि 1907 तक नौटंकी मथुरा, वृंदावन और हरियाणा से निकलकर कानपुर, लखनऊ, बनारस और बिहार तक फैल चुकी थी। आगे चलकर नौटंकी का गहरा प्रभाव पारसी थिएटर पर पड़ा। 20वीं सदी में पारसी थिएटर का स्वरूप बदल गया और वह एक संगठित कंपनी थिएटर के रूप में विकसित हुआ, जिसमें व्यापार और कला दोनों का संतुलन था।

1930-40 के दशक में दिखता था लोकनाट्य का प्रभाव
प्रो. शर्मा ने बताया कि फिल्म अभिनेता फिदा हुसैन, राज कपूर, गीता बाली जैसे कलाकारों और 1930-40 के दशक के सिनेमा में लोकनाट्य परंपराओं का प्रभाव स्पष्ट दिखाई देता है। कई प्रसिद्ध फिल्मी गीत सीधे नौटंकी और स्वांग की परंपरा से आए हैं। आज का सिनेमा केवल संवादों से नहीं, बल्कि परफॉर्मेंस से संचालित होता है। इसकी जड़ें नौटंकी और पारसी थिएटर से गहराई से जुड़ी हैं। नौटंकी ने भारतीय रंगमंच और सिनेमा को एक सशक्त सांस्कृतिक आधार दिया है।
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