विश्वविद्यालय प्रशासन का कहना है कि इन तकनीकों के उद्योगों तक पहुंचने से शोध का लाभ सीधे किसानों, स्वास्थ्य क्षेत्र और आम नागरिकों तक पहुंचेगा। इससे विश्वविद्यालय में विकसित नवाचारों का व्यावसायिक उपयोग भी बढ़ेगा और आत्मनिर्भर भारत अभियान को मजबूती मिलेगी।
समझौता समारोह कुलपति प्रो. अजित कुमार चतुर्वेदी की उपस्थिति में आयोजित हुआ। कुलसचिव राजन श्रीवास्तव ने दोनों कंपनियों के प्रतिनिधियों के साथ औपचारिक रूप से एमओयू पर हस्ताक्षर किए। इस अवसर पर कृषि विज्ञान संस्थान और आयुर्वेद संकाय के वैज्ञानिक, शोधकर्ता तथा विश्वविद्यालय के अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे।
पूरी प्रक्रिया का समन्वय विश्वविद्यालय के बौद्धिक संपदा अधिकार (आईपीआर) एवं प्रौद्योगिकी हस्तांतरण प्रकोष्ठ ने किया। विश्वविद्यालय का उद्देश्य शोध और नवाचार को उद्योगों से जोड़कर ऐसी तकनीकों का विकास और प्रसार करना है, जिनका सीधा लाभ समाज को मिल सके।
बीएचयू प्रशासन ने कहा कि भविष्य में भी विभिन्न क्षेत्रों में विकसित प्रौद्योगिकियों के व्यावसायिक हस्तांतरण और उद्योगों के साथ साझेदारी को बढ़ावा दिया जाएगा, ताकि विश्वविद्यालय में होने वाला शोध देश के विकास और जनहित में अधिक प्रभावी भूमिका निभा सके।