Varanasi News: शोध के परिणाम से कोविड संक्रमण से बचाव के लिए रणनीति बनाने में मदद मिलेगी। शोध में पता चला कि दक्षिण एशियाई लोगों में कोविड-19 वायरस का अलग असर पड़ा है। शोध के लिए पहले और दूसरे चक्र के संक्रमण के दौरान नमूने जुटाए गए थे।
कोविड महामारी के बाद इससे निपटने की तैयारियों पर बीएचयू के जीन वैज्ञानिकों ने शोध किया है। वैज्ञानिकों के छह सदस्यीय टीम ने 450 भारतीय और 393 विदेशी नमूनों की जांच की। इसमें पाया गया कि बीमारियों के संक्रमण, लक्षण के उभार में डीएनए महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
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बीएचयू के जीन वैज्ञानिक प्रो. ज्ञानेश्वर चौबे के मुताबिक व्यक्ति का डीएनए तय करता है कि कोरोना कितना घातक होगा। संक्रमित व्यक्ति की मृत्यु और रिकवरी में भी डीएनए का महत्वपूर्ण रोल होता है। शोध में पाया कि यूरोप, चीन और भारत के लोगों के स्वास्थ्य पर कोरोना ने अलग-अलग असर डाला। उनका दावा किया कि इस शोध से बड़ी आबादी को कोविड जैसी महामारी से बचाने में मदद मिलेगी।
450 भारतीय और 393 विदेशी नमूनों पर किया शोध
शोधकर्ता रुद्र कुमार पांडेय ने बताया कि यह शोध कोविड-19 के खिलाफ लड़ाई में एक महत्वपूर्ण कदम है। शोध के परिणाम से कोविड संक्रमण से बचाव के लिए रणनीति बनाने में मदद मिलेगी। शोध में पता चला कि दक्षिण एशियाई लोगों में कोविड-19 वायरस का अलग असर पड़ा है। इसके पीछे की वजह फ्यूरिन जीन के म्यूटेशन हैं।
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शोध से यह साफ हो गया है कि भारत और आसपास के देशों में कोविड महामारी का असर यूरोप के मुकाबले बेहद कम है। प्रो. ज्ञानेश्वर चौबे ने बताया कि शोध के लिए पहले और दूसरे चक्र के संक्रमण के दौरान नमूने जुटाए गए थे। इसमें म्यूटेशन भी मिला है। यह म्यूटेशन प्रतिरोधी कोशिकाओं को भी अपने अनुसार संचालित करता है।