विदाई समारोह में बोले बीएचयू के कुलपति प्रो. जीसी त्रिपाठी
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बीएचयू में कुलपति पद पर अपने कार्यकाल के अंतिम दिन प्रो. जीसी त्रिपाठी की ओर से कुलपतियों की नियुक्ति योग्यता पर न होने के बयान को दो पूर्व कुलपतियों ने खारिज कर दिया है। उनके इस बयान पर प्रो. लालजी सिंह, प्रो. पंजाब सिंह ने आश्चर्य व्यक्त करते हुए इस बयान को गलत बताया है। दोनों पूर्व कुलपतियों का कहना है कि इस पद के बारे में इस तरह की बात करना ठीक नहीं है।
प्रो. त्रिपाठी के इस बयान पर पूर्व कुलपति प्रो. लालजी सिंह ने कहा कि चाहे किसी भी क्षेत्र में हो इस पद पर योग्यता जरूरी होती है। जब तक योग्यता नहीं होगी तब तक कोई सम्मान नहीं देगा। उन्होंने कुलपति की ओर से खुद की नियुक्ति भी योग्यता पर न होने के बयान पर कहा कि इससे उनकी मानसिकता का पता चलता है। इस तरह का बयान बिल्कुल गलत है।
योग्य न मिलने पर अयोग्य नियुक्ति पर प्रो. सिंह ने कहा कि सब विश्वविद्यालयों में बीएचयू का वीसी अलग होता है। इसके बाद इस तरह का बयान देना ठीक नहीं है। कुलपति नियुक्ति की प्रक्रिया होती है जो लंबी चलती है। देर भले ही हो जाए लेकिन योग्यता पर होती है। उदाहरण के साथ बताया कि एक छात्र फेल हो गया तो दूसरे को कहता है कि मै ही नहीं फेल हुआ हूं,दूसरा भी फेल हुआ है। ऐसे में अपनी कमजोरी छिपाने के लिए की गई नियुक्तियों पर इस तरह का बयान दिया गया।
कुलपति पद पर योग्यता के आधार पर नियुक्ति न होने के बयान पर पूर्व कुलपति प्रो. पंजाब सिंह का कहना है कि इस पद पर बैठे लोगों को इस तरह की बात शोभा नहीं देती। इस बारे में उनसे बेहतर और कौन बता पाएगा कि नियुक्ति कैसे होती है। कुलपति की नियुक्ति प्रक्रिया के बारे में सभी को पता है।
मानव संसाधन मंत्रालय की ओर से इसके लिए विज्ञापन निकाला जाता है। फिर सर्च कमेटी बनती है और इसके बाद योग्यता के आधार पर नियुक्ति की जाती है। कहा कि पिछले सप्ताह ही मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावडेकर से मुलाकात के दौरान विश्वविद्यालय के बारे में बातचीत हुई।
उस दौरान उन्होंने जल्द ही कुलपति नियुक्ति की प्रक्रिया पूरी होने की जानकारी दी। मजबूरी में अयोग्य लोगों की नियुक्ति की बात है, तो ऐसी नौबत ही क्यों आने दी गई..? पहले से तैयार सूची अगर ऐसी आ गई थी तो उसमें बदलाव भी हो सकता था।