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बीएचयू: पहली बार मना बुद्ध का दक्षिण पूर्वी एशियाई त्योहार पवारणा दिवस, छात्र-छात्राओं ने बताया पर्व का महत्व

Tue, 07 Oct 2025 05:45 AM IST
अमन विश्वकर्मा अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।

सार

Varanasi News: पवारण दिवस को बौद्ध देशों में अत्यंत श्रद्धा और सम्मान के साथ मनाया जाता है। परंपरानुसार इस दिन विधि-विधान से पूजन होते हैं। पवारण एक बौद्ध अनुष्ठान है जो आश्विन पूर्णिमा को मनाया जाता है।
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पवारण दिवस पर माैजूद लोग। - फोटो : अमर उजाला
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Varanasi News: बीएचयू में पहली बार दक्षिण पूर्वी एशियाई देश का विख्यात बौद्ध पर्व पवारणा दिवस मनाया गया। इसी दिन अपनी माता महामाया देवी को स्वर्ग में अभिधम्म का उपदेश देने के बाद भगवान बुद्ध तावतिंस स्वर्ग से पृथ्वी पर आए थे। फिर उन्होंने ये गूढ़ उपदेश अपने प्रमुख शिष्य अरहंत सारिपुत्त को दिए। 

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पालि एवं बौद्ध अध्ययन विभाग के विद्यार्थियों ने सोमवार को म्यांमार, थाईलैंड, कंबोडिया, लाओस, श्रीलंका और वियतनाम जैसे देशों के विशेषज्ञों के साथ मिलकर एक विशेष कार्यक्रम कराया। विभागाध्यक्ष डॉ. अरुण कुमार यादव ने कहा कि इस दिन भिक्षुओं के वर्षावास (चातुर्मास) का समापन होता है।

म्यांमार के भिक्षु आए, हुआ मंगलपाठ
म्यांमार के भिक्षु पञ्ञावंस और भिक्षु पोणेय्य ने इस पर्व के इतिहास और परंपरा पर प्रस्तुति दी। थाईलैंड के अनंतचाय नगमचालाह ने थाई परंपरा पर अपने विचार साझा किए। वियतनाम के भिक्षु और भिक्षुणियों ने पवित्र मंगलपाठ प्रस्तुत किया। सिद्धार्थ नेगी ने तिब्बती दृष्टिकोण प्रस्तुत किया। 
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विकास कुमार ने मिथिला और वाराणसी क्षेत्र में मनाए जाने वाले हिंदू परंपराओं के बारे में बताया। कार्यक्रम में प्रो. प्रीति कुमारी दुबे, डॉ. बुद्धघोष, डॉ. शैलेंद्र कुमार सहित कई विदेशी छात्र-छात्राएं मौजूद रहीं।

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