इसके अलावा बीएचयू को छोड़ किसी भी सरकारी अस्पताल में सुपरस्पेशियलिटी सेवाएं मिलने की आस इस साल भी अधूरी रह गई। उधर, साल के शुरुआत में बीएचयू अस्पताल में एमआरआई, अल्ट्रासाउंड, टूडी इको जैसी जरूरी जांच के लिए एक से दो महीने तक इंतजार करने से मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ा।
ओपीडी बुकलेट, ट्रॉमा सेंटर में डिजिटल रिकॉर्ड से राहत
इस साल नवंबर महीने में बीएचयू अस्पताल में चार पेज वाली ओपीडी पर्ची की जगह मरीजों को 50 पेज का ओपीडी बुकलेट देने का फैसला होने से मरीजों को राहत हुई। ऐसा इसलिए कि ओपीडी बुकलेट की वैधता छह माह से बढ़ाकर एक साल कर दी गई। इसके साथ ही ट्रॉमा सेंटर में पहली बार ओपीडी, खून जांच, एक्सरे आदि जांच के डिजिटल रिकॉर्ड होने से भी दूर दराज से आने वाले मरीजों को बड़ी सहूलियत हो रही है।
एक ही छत के नीचे बुजुर्गों को इलाज मिलने के लिए बीएचयू अस्पताल परिसर में नेशनल एजिंग सेंटर बनने और ट्रॉमा सेंटर परिसर में क्रिटिकल केयर ब्लॉक के बनने का काम तेज होने की वजह से आने वाले दिनों में मरीजों को एक ही छत के नीचे गंभीर बीमारियों के उपचार की सुविधा मिलने की आस जगी है। इसी साल ट्रॉमा सेंटर देश का पहला लेवन वन संस्थान बना, जहां ओपीडी रिकॉर्ड ऑनलाइन हुई। इसके लिए अवार्ड भी मिला।