कार्यक्रम के चेयरमैन और आयुर्वेद संकाय के प्रो. ओपी सिंह ने कहा कि भारत में देसी गाय की 48 नस्लें हैं। देसी गाय के दूध की मलाई में पीलापन होता है। वैज्ञानिकों ने रिसर्च करके बताया कि इसमें स्वर्ण भस्म और चांदी भस्म आयनिक फॉर्म में पाया जाता है। इसलिए इसको रसायन कहा गया है। इससे किसी तरह की बीमारी नहीं होगी।
बुजुर्ग रोज खाए 10-20 ग्राम बिलौना घी
बुजुर्गों को देसी गाय के बिलौना घी का इस्तेमाल करना चाहिए। उसकी मलाई में दही मिलाकर उसको फरमेंट करके जो बनाते हैं, वही घी है। हर किसी को स्वस्थ रहने के लिए 10 से 20 ग्राम देसी घी का इस्तेमाल करना चाहिए। ए-1 और ए-2 मिल्क शरीर में सूजन और बीमारियां बढ़ा रहा है। पश्चिमी देश इसका खूब प्रचार प्रसार कर रहे हैं। हमें इन दूध से बचना चाहिए।
इस कार्यक्रम में आइएमएस-बीएचयू के निदेशक प्रो. एसएन संखवार और प्रो. सुनीता पेडनेकर समेत कई प्रोफेसरों और एक्सपर्ट ने गाय और उसके फायदों पर अपनी राय रखी।