BHU Doctors Strike : कोलकाता में प्रशिक्षु डॉक्टर के साथ दरिंदगी की घटना को लेकर बीएचयू में छह दिन से डॉक्टरों की हड़ताल के चलते 20 हजार से अधिक मरीज बिना इलाज के लौट गए।
बीएचयू अस्पताल में इमरजेंसी पर्चा काउंटर 99 नंबर के पास पेड़ के नीचे एक मां अपने दो साल के बेटे को लेकर गोद में बैठी रही। इमरजेंसी के बाहर स्ट्रेचर पर पड़े मरीज डॉक्टर को देखने का इंतजार करते रहे। डॉक्टरों की हड़ताल के छठे दिन रविवार की दोपहर में बीएचयू अस्पताल में कुछ इसी तरह का दृश्य देखने को मिला। यहां एक्सरे, अल्ट्रासाउंड जांच केंद्र के बाहर परिजन अपने मरीजों को स्ट्रेचर पर लेकर जांच कराने का इंतजार करते रहे।
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अब तक की छह दिन की हड़ताल में बीएचयू में ओपीडी के सुचारू रूप से न चलने की वजह से करीब 20 हजार से अधिक मरीज बिना इलाज लौट गए। साथ ही इन छह दिनों में करीब 500 से अधिक मरीजों की सर्जरी भी टालनी पड़ी। उनको हड़ताल के बाद आने को कहा गया है। रविवार को अवकाश होने की वजह से बीएचयू में ओपीडी तो बंद रही, लेकिन दोपहर में इमरजेंसी के बाहर भी सामान्य दिनों की तुलना में मरीजों की संख्या कम दिखी। इमरजेंसी के भूतल पर 20 बेड वाला दोपहर में खाली रहा।
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इमरजेंसी के बाहर दोपहर करीब 1 बजे अपने दो साल के बेटे अयांश को लेकर उसकी मां बैठी रही। बेटे को बुखार था और वह कमजोर हो गया था। डॉक्टर को दिखाने के बाद उसके पिता ही उसे पेड़ के नीचे बिठाकर दवा खिला रहे थे। औसतन बीएचयू अस्पताल में हर दिन करीब चार हजार नए और डेढ़ हजार के करीब फालोअप वाले मरीज आते हैं।
पहले इमरजेंसी में ली डॉक्टर की जानकारी तब एंबुलेंस से उतारा
बीएचयू अस्पताल में इलाज के इंतजार में मरीज
- फोटो : अमर उजाला
छह दिनों से चल रही हड़ताल में कुल मिलाकर अब तक कुल नौ हजार मरीज ही आ सके। ऐसे में करीब 20 हजार मरीजों को बिना इलाज लौटना पड़ा। इमरजेंसी ओटी के साथ ही सभी विभागों का जोड़ा जाए तो करीब 150 सर्जरी रोजाना होती है। अब तक छह दिन में 160 मरीजों की सर्जरी ही हो सकी। 500 से अधिक मरीजों को हड़ताल के बाद आने की बात कहकर सर्जरी टाल दी गई।
इमरजेंसी में दोपहर में एंबुलेंस से आई महिला आशा देवी को सांस लेने में तकलीफ थी। परिजन उसे इमरजेंसी वार्ड में ले जाना चाह रहे थे। नीचे उतारने से पहले दो सदस्य पहले इमरजेंसी पर्चा बनवाने की जानकारी एक गार्ड से पूछी। इसके बाद पर्चा लेकर इमरजेंसी में अंदर गए और डॉक्टर की उपलब्धता की जानकारी ली। इसके बाद करीब 15 मिनट बाद उसको एंबुलेंस से उतारा और फिर स्ट्रेचर पर लेकर इलाज करवाने गए।
एक्सरे कक्ष खुलने का करते रहे इंतजार
बीएचयू अस्पताल में इलाज के इंतजार में मरीज
- फोटो : अमर उजाला
इमरजेंसी से व्हीलचेयर पर लेकर करीब 50 वर्षीय एक मरीज को लेकर उसके परिजन एक्सरे करवाने पहुंचे। यहां पहले से स्ट्रेचर पर लिटाए एक मरीज को लेकर उस परिजन खड़े थे। लोग जांच कक्ष के खुलने का इंतजार करते रहे कि वो एक्सरे करवा सकें। इसके अलावा जांच कक्ष में पड़ी कुर्सियों पर तीन मरीज पहले से ही बैठै रहे।
ट्रॉमा सेंटर के बाहर बैठे रहे मरीजों के परिजन
ट्रॉमा सेंटर की इमरजेंसी में भर्ती मरीजों के परिजन बाहर गेट के पास बैठे रहे। उनका कहना था कि यहां इमरजेंसी में भी सामान्य दिनों की तुलना में डॉक्टर मरीजों को देखने कम आ रहे हैं।
दीनदयाल उपाध्याय जिला अस्पताल
ओपीडी में हर दिन 1400 से अधिक मरीज, इमरजेंसी भी बढ़ी
डॉक्टरों की हड़ताल से जिले के अन्य सरकारी अस्पतालों में मरीजों की संख्या बढ़ गई है। इसमें जिला अस्पताल में पांच दिनों में हर दिन 300 मरीज बढ़े हैं तो इमरजेंसी में भी 50 मरीजों का इजाफा देखने को मिल रहा है। जिला अस्पताल के एमएस डॉ. प्रेमप्रकाश का कहना है कि सामान्य दिनों में ओपीडी में करीब 1100 मरीज आते थे, वो हड़ताल की वजह से पिछले पांच दिनों से 1400 से अधिक पहुंच गई है। इमरजेंसी का ग्राफ भी बढ़ा है। पहले 24 घंटे में 80 से 100 मरीज इमरजेंसी में आते थे लेकिन इस समय करीब 140 मरीजों का इलाज किया जा रहा है। यहां शनिवार को 137 मरीज आए जबकि रविवार की दोपहर तक ही संख्या 40 से अधिक पहुंच गई थी।
मंडलीय अस्पताल कबीरचौरा
ओपीडी में 200 मरीज बढ़े, इमरजेंसी में मरीजों की संख्या 80 के पार
मंडलीय अस्पताल में भी पांच दिन से मरीजों की संख्या 200 बढ़ गई हैं। यहां इमरजेंसी भी मरीजों से भरी दिख रही है। अस्पताल के एसआईसी डॉ. एसपी सिंह का कहना है कि सामान्य दिनों में करीब 1000 मरीज इलाज करवाते हैं लेकिन इस समय पांच दिन से संख्या 1200 से 1300 पहुंच जा रही है। इमरजेंसी की संख्या भी 60 से बढ़कर 80 के पार पहुंच जा रही है।
तीन दिन से हर दिन ओपीडी में 900 मरीज
यहां की ओपीडी में भी मरीजों का ग्राफ बढ़ा है। यहां ओपीडी में हर दिन 700-800 मरीज आते हैं, जबकि तीन दिन में यह संख्या रोजाना 900 हो गई हैं। रविवार को यहां इमरजेंसी में डॉक्टर मरीज को देखते रहे।
क्या बोले अधिकारी
कोलकाता की घटना को लेकर चल रही हड़ताल के कारण सरकारी अस्पतालों, स्वास्थ्य केंद्रों पर तैनात डॉक्टरों, पैरामेडिकल स्टाफ को अलर्ट पर रहने को कहा गया है। जो भी मरीज ओपीडी, इमरजेंसी में आ रहे हैं, उनका जांच, इलाज किया जा रहा है। -डॉ. संदीप चौधरी, सीएमओ