इस शोध में बताया गया है कि कोविड की पहली लहर में वायरल लोड सबसे कम रहा। महिलाओं और बुजुर्गों में वायरल लोड पुरुषों और बच्चों की तुलना में ज्यादा पाया गया, जो उन्हें ज्यादा जोखिम में डाल रहा था। वायरल लोड जितना ज्यादा होगा, उसकी सीटी वैल्यू उतनी ही कम होगी, लेकिन बीमारी घातक होगी।
40 से कम सीटी वैल्यू वाला रहा कोविड पॉजिटिव
40 से कम सीटी वैल्यू को पॉजिटिव माना जाता है। शोधकर्ताओं ने डेटा से उम्र, लिंग, जांच की तारीख और सीटी वैल्यू जैसी जानकारियां लीं। अध्ययन का उद्देश्य था सीटी वैल्यू के माध्यम से वायरल लोड, बीमारी की गंभीरता और फैलाव के बीच संबंध समझना। शोध में सीटी वैल्यू को तीन भागों में बांटा गया- कम (25 से ज्यादा वायरल लोड), मध्यम (25-30) और ज्यादा (30 से ज्यादा वायरल लोड)।
अध्ययन में पांच उम्र समूह बनाए गए- बच्चे (0-9 साल), किशोर (10-19), युवा (20-39), मध्यम आयु (40-59) और बुजुर्ग (60+ साल)। बच्चों में सीटी वैल्यू सबसे ज्यादा (कम वायरल लोड), जबकि बुजुर्गों में खराब इम्युनिटी के चलते सबसे कम (ज्यादा वायरल लोड) सीटी वैल्यू रही। शोध में पाया गया कि सीटी वैल्यू में गिरावट के साथ नए मामले, मौतें बढ़ती हैं। 15 दिनों के औसत पर आधारित विश्लेषण से यह साफ हुआ कि कम सीटी वैल्यू ज्यादा गंभीर प्रकोप का संकेत है।
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अध्ययन के प्रमुख लेखक रुद्र कुमार पांडे और प्रो. ज्ञानेश्वर चौबे का कहना है कि सीटी वैल्यू सिर्फ जांच का माध्यम नहीं, बल्कि महामारी की निगरानी का मजबूत हथियार है। यह वायरल लोड, फैलाव और गंभीरता का अनुमान लगाने में मदद करता है। मणिपाल विश्वविद्यालय के प्रो. प्रशांत सुरावझला ने कहा कि यह अध्ययन भविष्य की महामारियों के लिए अहम सबक देता है।