फैमिली कोर्ट में ज्यादातर पति-पत्नी के बीच अलगाव के मामले शादी के तीन साल के अंदर के हैं। इसमें भी खासकर 25-30 साल के अंदर की महिलाएं और पुरुष हैं।
अदालत में दाखिल मामलों के पांच प्रमुख कारण अलगाव के
फैमिली कोर्ट की अधिवक्ता सारिका दूबे ने बताया कि ज्यादातर मामले सच्चाई छिपाकर शादी करके, नौकरी या पारिवारिक स्थिति की सही जानकारी न देने। पहले के प्रेम संबंध, शादी के बाद पुराने रिश्तों का खुलासा और इसके बाद विवाद होना। दहेज प्रताड़ना, आर्थिक मांग और उत्पीड़न के आरोप के मामले ज्यादा हैं। एक्स्ट्रा मेरिटल अफेयर्स और नशे की लत होना। वहीं, कुछ मामले नपुंशकता से जुड़े भी आते हैं। फैमिली कोर्ट में पहले काउंसलिंग की प्रक्रिया अपनाई जाती है। कई मामलों में सुलह भी हो जाती है, लेकिन बड़ी संख्या में जोड़े समझौते तक नहीं पहुंच पा रहे। पूर्व पुस्तकालय मंत्री अधिवक्ता राधेश्याम शर्मा ने बताया कि कुछ ऐसे भी मामले सामने आए जो शादी के 15 साल बाद अलगाव के लिए कोर्ट में दाखिल हुए।