गरला ग्राम पंचायत के परिवार रजिस्टर की नकल में भी मनोज के नाम और उसकी जाति कहार पिछड़ी होने का उल्लेख था। कई पहलुओं पर पड़ताल के बाद डीएम की अध्यक्षता वाली समिति ने वर्ष 2009 में सदर तहसील से जारी उसका अनुसूचित जनजाति का प्रमाण पत्र निरस्त करने का आदेश 21 अप्रैल 2022 को जारी किया है।
इस बाबत समिति के सदस्य सदर एसडीएम राजेश सिंह ने बताया कि किसी भी व्यक्ति की जाति उसके पिता से तय होती है। इस मामले में मनोज वर्मा के पिता की जाति सर्विस बुक में पिछड़ा होना अंकित है। उसके नाना की भी जाति पिछड़ी है। सभी तथ्यों की जांच के बाद प्रमाण पत्र निरस्त कर दिया गया है।
मनोज वर्मा के अनुसूचित जनजाति का प्रमाण पत्र लगाने के मामले में जिलाधिकारी सोनभद्र की अध्यक्षता वाली जिला स्तरीय समिति की संस्तुति के बाद जो आदेश किया गया है, वह पत्र सोशल मीडिया पर भी खूब वायरल हो रहा है। हालांकि इस बारे में जब समाजशास्त्र विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर मनोज वर्मा से बात करने की कोशिश की गई तो उनके फोन की घंटी बजती रही लेकिन फोन नहीं उठा।