फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

तरह-तरह की चर्चा: बीएचयू के असिस्टेंट प्रोफेसर ने तथ्यों को छिपाकर लिया था जनजाति का प्रमाण पत्र, हुआ निरस्त

Mon, 25 Apr 2022 12:09 PM IST
उत्पल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी/सोनभद्र

सार

बीएचयू के समाजशास्त्र विभाग में असिस्टेंट प्रोफेसर पद पर कार्यरत मनोज वर्मा के अनुसूचित जनजाति के प्रमाण पत्र को जिला स्तरीय समिति ने निरस्त कर दिया है। 
विज्ञापन
असिस्टेंट प्रोफेसर मनोज वर्मा - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

तथ्यों को छिपाकर सदर तहसील से जारी कराए गए अनुसूचित जनजाति के प्रमाण पत्र को जिला स्तरीय समिति ने निरस्त कर दिया है। स्क्रूटनी के दौरान यह स्पष्ट हुआ कि मनोज वर्मा नाम के जिस व्यक्ति को अनुसूचित जनजाति का प्रमाण पत्र जारी हुआ है, वह मूल रूप से पिछड़ी जाति का है। उसके पिता और नाना की भी यही जाति है।  मनोज वर्तमान में बीएचयू के समाजशास्त्र विभाग में असिस्टेंट प्रोफेसर पद पर कार्यरत हैं।

विज्ञापन


अब सोनभद्र में जिला स्तरीय समिति के इस आदेश के बाद उनकी नियुक्ति को लेकर भी तरह-तरह की चर्चाएं हो रही हैं।  चंदौली जिले के सकलडीहा तहसील अंतर्गत चर्तुभुजपुर गांव निवासी अनंत नारायण मिश्र ने शिकायत किया था कि सदर तहसील के वैनी गांव निवासी मनोज कुमार वर्मा ने तथ्यों को छिपाकर खरवार (अनुसूचित जनजाति) का प्रमाण पत्र हासिल कर लिया है, जबकि वह मूल रूप से कहार (पिछड़ी जाति) का है।

उसके पिता के सर्विस बुक में भी पिछड़ी जाति का ही उल्लेख है। उसका मूल निवास चंदौली जिले के चकिया तहसील अंतर्गत गरला गांव है। शिकायत पर डीएम की अध्यक्षता में कमेटी गठित कर इसकी जांच के निर्देश दिए गए थे। समिति ने मनोज वर्मा के पिता और नाना की जाति का सत्यापन किया। दोनों की जाति कहार पाई गई।

विज्ञापन
Trending Videos

गरला ग्राम पंचायत के परिवार रजिस्टर की नकल में भी मनोज के नाम और उसकी जाति कहार पिछड़ी होने का उल्लेख था। कई पहलुओं पर पड़ताल के बाद डीएम की अध्यक्षता वाली समिति ने वर्ष 2009 में सदर तहसील से जारी उसका अनुसूचित जनजाति का प्रमाण पत्र निरस्त करने का आदेश 21 अप्रैल 2022 को जारी किया है।

इस बाबत समिति के सदस्य सदर एसडीएम राजेश सिंह ने बताया कि किसी भी व्यक्ति की जाति उसके पिता से तय होती है। इस मामले में मनोज वर्मा के पिता की जाति सर्विस बुक में पिछड़ा होना अंकित है। उसके नाना की भी जाति पिछड़ी है। सभी तथ्यों की जांच के बाद प्रमाण पत्र निरस्त कर दिया गया है।
विज्ञापन

सोशल मीडिया पर वायरल हो रही आदेश की प्रति

मनोज वर्मा के अनुसूचित जनजाति का प्रमाण पत्र लगाने के मामले में जिलाधिकारी सोनभद्र की अध्यक्षता वाली जिला स्तरीय समिति की संस्तुति के बाद जो आदेश किया गया है, वह पत्र सोशल मीडिया पर भी खूब वायरल हो रहा है। हालांकि इस बारे में जब समाजशास्त्र विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर मनोज वर्मा से बात करने की कोशिश की गई तो उनके फोन की घंटी बजती रही लेकिन फोन नहीं उठा। 
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें